February 2022

एक टोकरी भर मिट्टी ~ माधवराव सप्रे की कहानी | Ek Tokari Bhar Mitti Kahani Madhav Rao Sapre

पढ़िए “एक टोकरी भर मिट्टी – माधवराव सप्रे की कहानी” (Ek Tokari Bhar Mitti Kahani Madhav Rao Sapre Story). एक निर्धन वृद्धा स्त्री की प्रेरणादायक कहानी : Ek Tokari Bhar Mitti Kahani Madhav Rao Sapre किसी श्रीमान जमींदार के महल के पास एक गरीब अनाथ विधवा की झोंपड़ी थी. जमींदार साहब को अपने महल का […]

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चैप्टर 21 मनोरमा : मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 21 Manorama Novel By Munshi Premchand Read Online

Chapter 21 Manorama Novel By Munshi Premchand Chapter 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 Prev | Next | All Chapters जगदीशपुर के ठाकुर द्वारे पर नित सादगी महात्मा आते रहते थे। शंखधर उनके पास जा बैठता और

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चैप्टर 4 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास

Chapter 4 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters चंचल प्रकृति बालकों के लिए अंधे विनोद की वस्तु हुआ करते हैं। सूरदास को उनकी निर्दय बाल-क्रीड़ाओं से इतना कष्ट होता था कि वह मुँह-अंधेरे घर से निकल पड़ता और चिराग जलने के बाद लौटता। जिस दिन उसे जाने में देर होती,

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चैप्टर 3 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास

Chapter 3 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Chapter 1 | 2 | 3 | 4 Prev | Next | All Chapters मि. जॉन सेवक का बंगला सिगरा में था. उनके पिता मि. ईश्वर सेवक ने सेना-विभाग में पेंशन पाने के बाद वहीं मकान बनवा लिया था, और अब तक उसके स्वामी थे. इसके आगे उनके

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चैप्टर 2 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास

Chapter 2 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Chapter 1 | 2 | 3 | 4 Prev | Next | All Chapters सूरदास लाठी टेकता हुआ धीरे-धीरे घर चला. रास्ते में चलते-चलते सोचने लगा- ‘यह है बड़े आदमियों की स्वार्थपरता! पहले कैसे हेकड़ी दिखाते थे, मुझे कुत्तो से भी नीचा समझा; लेकिन ज्यों ही मालूम हुआ

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चैप्टर 1 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास

Chapter 1 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Chapter 1 | 2 | 3 | 4 Next | All Chapters शहर अमीरों के रहने और क्रय-विक्रय का स्थान है. उसके बाहर की भूमि उनके मनोरंजन और विनोद की जगह है. उसके मध्य भाग में उनके लड़कों की पाठशालाएं और उनके मुकद़मेबाजी के अखाड़े होते हैं, जहाँ

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