चैप्टर 42 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 42 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 42 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters अदालत ने अगर दोनों युवकों को कठिन दंड दिया, तो जनता ने भी सूरदास को उससे कम कठिन दंड न दिया। चारों ओर थुड़ी-थुड़ी होने लगी। मुहल्लेवालों का तो कहना ही क्या, आस-पास के गाँववाले भी दो-चार खोटी-खरी सुना जाते थे-माँगता तो … Read more

चैप्टर 41 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 41 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 41 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters प्रभु सेवक ने तीन वर्ष अमेरिका में रहकर और हजारों रुपये खर्च करके जो अनुभव और ज्ञान प्राप्त किया था, वह मि. जॉन सेवक ने उनकी संगति से उतने ही महीनों में प्राप्त कर लिया। इतना ही नहीं, प्रभु सेवक की भाँति … Read more

चैप्टर 40 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 40 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 40 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters मिल के तैयार होने में अब बहुत थोड़ी कसर रह गई थी। बाहर से तम्बाकू की गाड़ियाँ लदी चली आती थीं। किसानों को तम्बाकू बोने के लिए दादनी दी जा रही थी। गवर्नर से मिल को खोलने की रस्म अदा करने के … Read more

चैप्टर 39 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 39 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 39 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters तीसरे दिन यात्रा समाप्त हो गई, तो संधया हो चुकी थी। सोफिया और विनय दोनों डरते हुए गाड़ी से उतरे कि कहीं किसी परिचित आदमी से भेंट न हो जाए। सोफिया ने सेवा-भवन (विनयसिंह के घर) चलने का विचार किया; लेकिन आज … Read more

चैप्टर 38 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 38 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 38 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters सोफिया और विनय रात-भर तो स्टेशन पर पड़े रहे। सबेरे समीप के गाँव में गए, जो भीलों की एक छोटी-सी बस्ती थी। सोफिया को यह स्थान बहुत पसंद आया। बस्ती के सिर पर पहाड़ का साया था, पैरों के नीचे एक पहाड़ी … Read more

चैप्टर 37 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 37 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 37 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters प्रभु सेवक बड़े उत्साही आदमी थे। उनके हाथ से सेवक-दल में एक नई सजीवता का संचार हुआ। संख्या दिन-दिन बढ़ने लगी। जो लोग शिथिल और उदासीन हो रहे थे, फिर नए जोश से काम करने लगे। प्रभु सेवक की सज्जनता और सहृदयता … Read more

चैप्टर 36 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 36 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 36 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters मिस्टर जॉन सेवक ने ताहिर अली की मेहनत और ईमानदारी से प्रसन्न होकर खालों पर कुछ कमीशन नियत कर दिया था। इससे अब उनकी आय अच्छी हो गई थी, जिससे मिल के मजदूरों पर उनका रोब था, ओवरसियर और छोटे-छोटे क्लर्क उनका … Read more

चैप्टर 35 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 35 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 35 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters विनयसिंह आबादी में दाखिल हुए, तो सबेरा हो गया था। थोड़ी दूर चले थे कि एक बुढ़िया लाठी टेकती सामने से आती हुई दिखाई दी। इन्हें देखकर बोली-बेटा, गरीब हूँ। बन पडे, तो कुछ दे दो। धरम होगा। नायकराम-सवेरे राम-नाम नहीं लेती, … Read more

चैप्टर 34 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 34 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 34 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters प्रभु सेवक ने घर आते ही मकान का जिक्र छेड़ दिया। जान सेवक यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुए कि अब इसने कारखाने की ओर धयान देना शुरू किया। बोले-हाँ, मकानों का बनना बहुत जरूरी है। इंजीनियर से कहो, एक नक्शा बनाएँ। मैं … Read more

चैप्टर 12 आँख की किरकिरी उपन्यास (चोखेर बाली उपन्यास) रवींद्रनाथ टैगोर | Chapter 12 Aankh Ki Kirkiri (Chokher Bali) Novel By Rabindranath Tagore

Chapter 12 Aankh Ki Kirkiri Novel By Rabindranath Tagore Prev | Next | All Chapters एक दिन आखिर आ कर महेंद्र ने माँ से कहा – ‘यह अच्छी बात है, माँ? दूसरे के घर की एक जवान विधवा को घर रख कर एक भारी जिम्मेदारी कंधे पर लाद लेने की क्या पड़ी है? जाने कब … Read more