चैप्टर 50 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 50 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 50 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | All Chapters कुँवर विनयसिंह की वीर मृत्यु के पश्चात रानी जाह्नवी का सदुत्साह दुगुना हो गया। वह पहले से कहीं ज्यादा क्रियाशील हो गईं। उनके रोम-रोम में असाधारण स्फूर्ति का विकास हुआ। वृध्दावस्था की आलस्यप्रियता यौवन-काल की कर्मण्यता में परिणत हो गई। कमर बाँधी और सेवक-दल का … Read more

चैप्टर 49 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 49 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 49 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters इधर सूरदास के स्मारक के लिए चंदा जमा किया जा रहा था, उधर कुलियों के टोले में शिलान्यास की तैयारियाँ हो रही थीं। नगर के गण्यमान्य पुरुष निमंत्रित हुए थे। प्रांत के गवर्नर से शिला-स्थापना की प्रार्थना की गई थी। एक गार्डन … Read more

देवी लघुकथा मुंशी प्रेमचंद | Devi Laghukatha Munshi Premchand

देवी लघुकथा मुंशी प्रेमचंद (Devi Laghukatha Munshi Premchand Devi Laghukatha Munshi Premchand रात भीग चुकी थी। मैं बरामदे में खडा था। सामने अमीनुददौला पार्क नींद में डूबा खड़ा था। सिर्फ एक औरत एक तकियादार बेंच पर बैठी हुंई थी। पार्क के बाहर सड़क के किनारे एक फ़कीर खड़ा राहगीरों को दुआएं दे रहा था – … Read more

सवा सेर गेहूं मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Sawa Ser Gehun Munshi Premchand

सवा सेर गेहूं मुंशी प्रेमचंद की कहानी (Sawa Ser Gehun Munshi Premchand Story) Sawa Se Gehun Munshi Premchand  किसी गाँव में शंकर नाम का एक कुर्मी किसान रहता था। सीधा-सादा गरीब आदमी था, अपने काम-से-काम, न किसी के लेने में, न किसी के देने में। छक्का-पंजा न जानता था, छल-प्रपंच की उसे छूत भी न … Read more

हीरे का हार कहानी चंद्रधर शर्मा गुलेरी | Heere Ka Haar Story Chandradhar Sharma Guleri

हीरे का हार कहानी चंद्रधर शर्मा गुलेरी (Heere Ka Haar Story Chandradhar Sharma Guleri) Heere Ka Haar Story Chandradhar Sharma Guleri (1) आज सवेरे ही से गुलाबदेई काम में लगी हुई है। उसने अपने मिट्टी के घर के आँगन को गोबर से लीपा है, उस पर पीसे हुए चावल से मंडन माँडे हैं। घर की … Read more

बंद दरवाज़ा मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Band Darwaza Story Munshi Premchand

बंद दरवाज़ा मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Band Darwaza Story Munshi Premchand Band Darwaza Story Munshi Premchand सूरज क्षितिज की गोद से निकला, बच्चा पालने से—वही स्निग्धता, वही लाली, वही खुमार, वही रोशनी। मैं बरामदे में बैठा था। बच्चे ने दरवाजे से झांका। मैंने मुस्कराकर पुकारा। वह मेरी गोद में आकर बैठ गया। उसकी शरारतें … Read more

चैप्टर 13 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 13 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas

Chapter 13 Do Sakhiyan Munshi Premchand Prev | All Chapters  दिल्ली 20-2-26 प्यारी बहन, तुम्हारा पत्र पढ़कर मुझे तुम्हारे ऊपर दया आयी। तुम मुझे कितना ही बुरा कहो, पर मैं अपनी यह दुर्गति किसी तरह न सह सकती, किसी तरह नहीं। मैंने या तो अपने प्राण ही दे दिये होते, या फिर उस सास का … Read more

चैप्टर 12 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 12 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas

चैप्टर 12 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 12 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas Chapter 12 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas Prev | Next| All Chapters  काशी 10-2-26 प्रिय पद्मा, कई दिन तक तुम्हारे पत्र की प्रतीक्षा करने के बाद आज यह खत लिख रही हूँ। मैं अब भी आशा कर … Read more

चैप्टर 11 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 11 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas

चैप्टर 11 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 11 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas Chapter 11 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas Prev | Next| All Chapters  दिल्ली 5-2-26 प्यारी चंदा  क्या लिखूं,, मुझ पर तो विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा! हाय, वह चले गए। मेरे विनोद का तीन दिन से पता … Read more

बाबा जी का भोग मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Babaji Ka Bhog Munshi Premchand Ki Kahani

बाबा जी का भोग कहानी मुंशी प्रेमचंद (Baba Ji Ka Bhog Story Munshi Premchand)  Baba Ji Ka Bhog Story Munshi Premchand रामधन अहीर के द्वार पर एक साधु आकर बोला – “बच्चा तेरा कल्याण हो, कुछ साधु पर श्रद्धा कर।” रामधन ने जाकर स्त्री से कहा – “साधु द्वार पर आये हैं, उन्हें कुछ दे … Read more