चैप्टर 4 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 4 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas

Chapter 4 Do Sakhiyan Munshi Premchand Prev | Next| All Chapters  गोरखपुर 1-9-25 प्यारी पद्मा, तुम्हारा पत्र पढ़कर चित्त को बड़ी शांति मिली। तुम्हारे न आने ही से मैं समझ गई थी कि विनोद बाबू तुम्हें हर ले गए, मगर यह न समझी थी कि तुम मंसूरी पहुँच गयी। अब उस आमोद-प्रमोद में भला ग़रीब … Read more

प्रेम की होली मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Prem Ki Holi Story Munshi Premchand

प्रेम की होली मुंशी प्रेमचंद की कहानी (Prem Ki Holi Kahani Munshi Premchand) Prem Ki Holi Kahani Munshi Premchand 1 गंगी का सत्रहवाँ साल था, पर वह तीन साल से विधवा थी, और जानती थी कि मैं विधवा हूँ, मेरे लिए संसार के सुखों के द्वार बंद हैं। फिर वह क्यों रोये और कलपे? मेले … Read more

जादू मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Jadoo Story Munshi Premchand

जादू कहानी मुंशी प्रेमचंद (Jadoo Story Munshi Premchand) Jadoo Story Munshi Premchand ‘नीला तुमने उसे क्यों लिखा ?’ ‘मीना क़िसको ?’ ‘उसी को ?’ ‘मैं नहीं समझती !’ ‘खूब समझती हो ! जिस आदमी ने मेरा अपमान किया, गली-गली मेरा नाम बेचता फिरा, उसे तुम मुँह लगाती हो, क्या यह उचित है ?’ ‘तुम गलत … Read more

ख़ुदी मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Khudi Kahani Munshi Premchand

ख़ुदी कहानी मुंशी प्रेमचंद (Khudi Kahani Munshi Premchand) Khudi Story Munshi Premchand  Khudi Kahani Munshi Premchand (1) मुन्नी जिस वक्त दिलदार नगर में आयी, उसकी उम्र पांच साल से ज्यादा न थी। वह बिल्कुल अकेली थी। माँ-बाप दोनों न मालूम मर गये या कहीं परदेस चले गये थे। मुन्नी सिर्फ इतना जानती थी कि कभी … Read more

चैप्टर 3 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 3 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas

Chapter 3 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas Prev | Next| All Chapters  मंसूरी 5-8-25 प्यारी चंदा, सैंकड़ों बातें लिखनी हैं, किस क्रम से शुरू करूं, समझ में नहीं आता। सबसे पहले तुम्हारे विवाह के शुभ अवसर पर न पहुँच सकने के लिए क्षमा चाहती हूँ। मैं आने का निश्चय कर चुकी थी। मैं और … Read more

चैप्टर 2 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 2 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas

Chapter 2 Do Sakhiyan Munshi Premchand  Prev | Next| All Chapters  गोरखपुर 5-7-25 प्रिय पद्मा, भला एक युग के बाद तुम्हें मेरी सुधि तो आई। मैंने तो समझा था, शायद तुमने परलोक-यात्रा कर ली। यह उस निष्ठुरता का दंड ही है, जो कुसुम तुम्हें दे रही है। 15 अप्रेल को कॉलेज बंद हुआ और एक … Read more

चैप्टर 45 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 45 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 45 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters पाँड़ेपुर में गोरखे अभी तक पड़ाव डाले हुए थे। उनके उपलों के जलने से चारों तरफ धुआँ छाया हुआ था। उस श्यामावरण में बस्ती के ख्रडहर भयानक मालूम होते थे। यहाँ अब भी दिन में दर्शकों की भीड़ रहती थी। नगर में … Read more

चैप्टर 1 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 1 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas

Chapter 1 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas Next| All Chapters  लखनऊ 1-7-25 प्यारी बहन, जब से यहाँ आयी हूँ, तुम्हारी याद सताती रहती है। काश! तुम कुछ दिनों के लिए यहाँ चली आतीं, तो कितनी बहार रहती। मैं तुम्हें अपने विनोद से मिलाती। क्या यह संभव नहीं है? तुम्हारे माता-पिता क्या तुम्हें इतनी आज़ादी … Read more

कौशल मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Kaushal Munshi Premchand Story

कौशल मुंशी प्रेमचंद की कहानी (Kaushal Munshi Premchand Story) Kaushal Munshi Premchand Ki Kahani एक आलस्य के मारे पंडितजी की कहानी है, जिनकी पत्नी माया को सोने के हार की लालसा थी। पंडित काम करे, तो पैसे आए। माया पड़ोसन का हार उन्हें दिखाने ले आई और उसी रात घर में चोरी हो गई। चोर … Read more

रक्षाबंधन विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक की कहानी | Rakshabandhan Vishwambharnath Sharma Kaushik Ki Kahani

रक्षाबंधन विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक की कहानी  (Rakshabandhan Vishwambharnath Sharma Kaushik Ki Kahani) Rakshabandhan Story Vishwambharnath Sharma Kaushik  Rakshabandhan Vishwambharnath Sharma Kaushik Ki Kahani (१) ‘माँ, मैं भी राखी बांधूंगी।’ श्रावण की धूम-धाम है। नगरवासी स्त्री-पुरुष बड़े आनंद तथा उत्साह से श्रावणी का उत्सव मना रहे हैं। बहनें भाइयों के और ब्राह्मण अपने यजमानों के राखियाँ … Read more