चैप्टर 42 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 42 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 42 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters अदालत ने अगर दोनों युवकों को कठिन दंड दिया, तो जनता ने भी सूरदास को उससे कम कठिन दंड न दिया। चारों ओर थुड़ी-थुड़ी होने लगी। मुहल्लेवालों का तो कहना ही क्या, आस-पास के गाँववाले भी दो-चार खोटी-खरी सुना जाते थे-माँगता तो … Read more

चैप्टर 41 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 41 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 41 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters प्रभु सेवक ने तीन वर्ष अमेरिका में रहकर और हजारों रुपये खर्च करके जो अनुभव और ज्ञान प्राप्त किया था, वह मि. जॉन सेवक ने उनकी संगति से उतने ही महीनों में प्राप्त कर लिया। इतना ही नहीं, प्रभु सेवक की भाँति … Read more

अनाथ लड़की मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Anath Ladki Munshi Premchand Ki Kahani

अनाथ लड़की मुंशी प्रेमचंद की कहानी (Anath Ladki Munshi Premchand Ki Kahani) Anath Ladki Story By Munshi Premchand  Anath Ladki Munshi Premchand Ki Kahani (1) सेठ पुरुषोत्तमदास पूना की सरस्वती पाठशाला का मुआयना करने के बाद बाहर निकले, तो एक लड़की ने दौड़कर उनका दामन पकड़ लिया। सेठ जी रुक गये और मुहब्बत से उसकी … Read more

नरक का मार्ग मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Narak Ka Maarg Munshi Premchand Ki Kahani

नरक का मार्ग प्रेमचंद की कहानी | Narak Ka Maarg Munshi Premchand Ki Kahani | Narak Ka Maarg Story By Munshi Premchand Narak Ka Maarg Munshi Premchand Ki Kahani (1) रात ‘भक्तमाल’ पढ़ते-पढ़ते न जाने कब नींद आ गयी। कैसे-कैसे महात्मा थे, जिनके लिए भगवत्-प्रेम ही सबकुछ था, इसी में मग्न रहते थे। ऐसी भक्ति … Read more

चैप्टर 40 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 40 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 40 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters मिल के तैयार होने में अब बहुत थोड़ी कसर रह गई थी। बाहर से तम्बाकू की गाड़ियाँ लदी चली आती थीं। किसानों को तम्बाकू बोने के लिए दादनी दी जा रही थी। गवर्नर से मिल को खोलने की रस्म अदा करने के … Read more

चैप्टर 39 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 39 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 39 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters तीसरे दिन यात्रा समाप्त हो गई, तो संधया हो चुकी थी। सोफिया और विनय दोनों डरते हुए गाड़ी से उतरे कि कहीं किसी परिचित आदमी से भेंट न हो जाए। सोफिया ने सेवा-भवन (विनयसिंह के घर) चलने का विचार किया; लेकिन आज … Read more

चैप्टर 38 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 38 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 38 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters सोफिया और विनय रात-भर तो स्टेशन पर पड़े रहे। सबेरे समीप के गाँव में गए, जो भीलों की एक छोटी-सी बस्ती थी। सोफिया को यह स्थान बहुत पसंद आया। बस्ती के सिर पर पहाड़ का साया था, पैरों के नीचे एक पहाड़ी … Read more

चैप्टर 37 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 37 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 37 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters प्रभु सेवक बड़े उत्साही आदमी थे। उनके हाथ से सेवक-दल में एक नई सजीवता का संचार हुआ। संख्या दिन-दिन बढ़ने लगी। जो लोग शिथिल और उदासीन हो रहे थे, फिर नए जोश से काम करने लगे। प्रभु सेवक की सज्जनता और सहृदयता … Read more

चैप्टर 36 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 36 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 36 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters मिस्टर जॉन सेवक ने ताहिर अली की मेहनत और ईमानदारी से प्रसन्न होकर खालों पर कुछ कमीशन नियत कर दिया था। इससे अब उनकी आय अच्छी हो गई थी, जिससे मिल के मजदूरों पर उनका रोब था, ओवरसियर और छोटे-छोटे क्लर्क उनका … Read more