देवी लघुकथा मुंशी प्रेमचंद | Devi Laghukatha Munshi Premchand

देवी लघुकथा मुंशी प्रेमचंद (Devi Laghukatha Munshi Premchand Devi Laghukatha Munshi Premchand रात भीग चुकी थी। मैं बरामदे में खडा था। सामने अमीनुददौला पार्क नींद में डूबा खड़ा था। सिर्फ एक औरत एक तकियादार बेंच पर बैठी हुंई थी। पार्क के बाहर सड़क के किनारे एक फ़कीर खड़ा राहगीरों को दुआएं दे रहा था – … Read more