चैप्टर 10 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 10 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas

Chapter 10 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas Prev | Next| All Chapters  काशी 5-1-26 बहन, तुम्हारा पत्र पढ़कर मुझे ऐसा मालूम हुआ कि कोई उपन्यास पढ़कर उठी हूं। अगर तुम उपन्यास लिखों, तो मुझे विश्वास है, उसकी धूम मच जाए। तुम आप उसकी नायिका बन जाना। तुम ऐसी-ऐसी बातें कहां सीख गयी, मुझे तो … Read more

चैप्टर 9 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 9 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas

Chapter 9 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas Prev | Next| All Chapters  दिल्ली 1-2-26 प्यारी बहन, तुम्हारे प्रथम मिलन की कुतूहलमय कथा पढ़कर चित्त प्रसन्न हो गया। मुझे तुम्हारे ऊपर हसद हो रहा है। मैंने समझा था, तुम्हें मुझ पर हसद होगा, पर क्रिया उलटी हो गयी, तुम्हें चारों ओर हरियाली ही नजर आती … Read more

राष्ट्र का सेवक मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Rashtra Ka Sevak Story By Munshi Premchand

प्रस्तुत है : राष्ट्र का सेवक मुंशी प्रेमचंद की कहानी  (Rashtra Ka Sevak Story By Munshi Premchand)। मुंशी प्रेमचंद की ये कहानी कथनी और करनी के अंतर को दर्शाती है।  Rashtra Ka Sevak Story By Munshi Premchand राष्ट्र के सेवक ने कहा—देश की मुक्ति का एक ही उपाय है और वह है नीचों के साथ … Read more

चैप्टर 8 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 8 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas

चैप्टर 8 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 8 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas Chapter 8 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas Prev | Next| All Chapters  काशी 25-12-25 प्यारी पद्मा, तुम्हारा पत्र पढ़कर मुझे कुछ दु:ख हुआ, कुछ हँसी आयी, कुछ क्रोध आया। तुम क्या चाहती हो, यह तुम्हें खुद नहीं … Read more

चैप्टर 48 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 48 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 48 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters काशी के म्युनिसिपल बोर्ड में भिन्न-भिन्न राजनीतिक सम्प्रदायों के लोग मौजूद थे। एकवाद से लेकर जनसत्तावाद तक सभी विचारों के कुछ-न-कुछ आदमी थे। अभी तक धन का प्राधान्य नहीं था, महाजनों और रईसों का राज्य था। जनसत्ता के अनुयाई शक्तिहीन थे। उन्हें … Read more

चैप्टर 47 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 47 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 47 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters संध्या हो गई थी। मिल के मजदूर छुट्टी पा गए थे। आजकल दूनी मजदूरी देने पर भी बहुत थोड़े मजदूर काम करने आते थे। पाँड़ेपुर में सन्नाटा छाया हुआ था। वहाँ अब मकानों के भग्नावशेष के सिवा कुछ नजर न आता था। … Read more

चैप्टर 7 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 7 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas

Chapter 7 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas Prev | Next| All Chapters  दिल्ली 15-12-25 प्यारी बहन, तुझसे बार-बार क्षमा मांगती हूँ, पैरों पड़ती हूँ। मेरे पत्र न लिखने का कारण आलस्य न था, सैर-सपाटे की धुन न थी। रोज सोचती थी कि आज लिखूंगी, पर कोई-न-कोई ऐसा काम आ पड़ता था, कोई ऐसी बात … Read more

चैप्टर 46 रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 46 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand

Chapter 46 Rangbhoomi Novel By Munshi Premchand Prev | Next | All Chapters चारों आदमी शफाखाने पहुँचे, तो नौ बज चुके थे। आकाश निद्रा में मग्न, आँखें बंद किए पड़ा हुआ था, पर पृथ्वी जाग रही थी। भैरों खड़ा सूरदास को पंखा झल रहा था। लोगों को देखते ही उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे। … Read more

बड़े भाई साहब मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Bade Bhai Sahab Munshi Premchand

बड़े भाई साहब मुंशी प्रेमचंद की कहानी (Bade Bhai Sahab Munshi Premchand Story) Bade Bhai Sahab Munshi Premchand (1) मेरे भाई साहब मुझसे पांच साल बड़े थे, लेकिन तीन दरजे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था, जब मैंने शुरू किया; लेकिन तालीम जैसे महत्व के मामले में वह जल्दबाजी से काम … Read more

चैप्टर 6 दो सखियाँ मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 6 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas

Chapter 6 Do Sakhiyan Munshi Premchand Ka Upanyas Prev | Next| All Chapters  गोरखपुर 25-9-25 प्यारी पद्मा, कल तुम्हारा खत मिला, आज जवाब लिख रही हूँ। एक तुम हो कि महीनों रटाती हो। इस विषय में तुम्हें मुझसे उपदेश लेना चाहिए। विनोद बाबू पर तुम व्यर्थ ही आक्षेप लगा रही हो। तुमने क्यों पहले ही … Read more