चैप्टर 6 कायाकल्प मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास

चैप्टर 6 कायाकल्प मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 6 Kayakalp Novel By Munshi Premchand |Chapter 6 Kayakalp Munshi Premchand Ka Upanyas Chapter 6 Kayakalp Novel By Munshi Premchand मुंशी वज्रधर उन रेल के मुसाफिरों में थे, जो पहले तो गाड़ी में खड़े होने की जगह मांगते हैं, फिर बैठने की फिक्र करने लगते हैं … Read more

चैप्टर 5 कायाकल्प मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास

चैप्टर 5 कायाकल्प मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 5 Kayakalp Novel By Munshi Premchand | Chapter 5 Kayakalp Munshi Premchand Ka Upanyas  Chapter 5 Kayakalp Novel By Munshi Premchand संध्या समय जब रेलगाड़ी बनारस से चली तो यशोदानंदन ने चक्रधर से पूछा-क्यों भैया, तुम्हारी राय में झूठ बोलना किसी दशा में क्षम्य है या … Read more

चैप्टर 2 प्रेमाश्रम मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 2 Premashram Novel By Munshi Premchand Read Online

चैप्टर 2 प्रेमाश्रम मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 2 Premashram Novel By Munshi Premchand Read Online Chapter 2 Premashram Novel By Munshi Premchand  लखनपुर के जमींदारों का मकान काशी में औरंगाबाद के निकट था। मकान के दो खण्ड आमने-सामने बने हुए थे। एक जनाना मकान था, दूसरी मरदानी बैठक। दोनों खण्डों के बीच की … Read more

चैप्टर 1 प्रेमाश्रम मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 1 Premashram Novel By Munshi Premchand Read Online

चैप्टर 1 प्रेमाश्रम मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 1 Premashram Novel By Munshi Premchand Read Online Chapter 1 Premashram Novel By Munshi Premchand  सन्ध्या हो गई है। दिन भर के थके-माँदे बैल खेत से आ गये हैं। घरों से धुएँ के काले बादल उठने लगे। लखनपुर में आज परगने के हाकिम की परताल थी। … Read more

चैप्टर 4 कायाकल्प मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास

चैप्टर 4 कायाकल्प मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 4 Kayakalp Novel By Munshi Premchand Chapter 4 Kayakalp Novel By Munshi Premchand चक्रधर डरते हुए घर पहुंचे, तो क्या देखते हैं कि द्वार पर चारपाई पड़ी हुई है; उस पर कालीन बिछी हुई है और एक अधेड़ उम्र के महाशय उस पर बैठे हुए हैं। … Read more

चैप्टर 3 कायाकल्प मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास

चैप्टर 3 कायाकल्प मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 3 Kayakalp Novel By Munshi Premchand Chapter 3 Kayakalp Novel By Munshi Premchand कई महीने बीत गए। चक्रधर महीने के अंत में रुपए लाते और माता के हाथ पर रख देते। अपने लिए उन्हें रुपए की कोई जरूरत न थी। दो मोटे कुर्तों पर साल काट … Read more

चैप्टर 2 कायाकल्प मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास

चैप्टर 2 कायाकल्प मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 2 Kayakalp Novel By Munshi Premchand Chapter 2 Kayakalp Novel By Munshi Premchand बनारस में महात्मा कबीर के चौरे के निकट मुंशी वज्रधरसिंह का मकान है। आप हैं तो राजपूत पर अपने को ‘मुंशी’ लिखते और कहते हैं। ‘मुंशी’ की उपाधि से आपको बहुत प्रेम है। … Read more

चैप्टर 1 कायाकल्प मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 1 Kayakalp Novel By Munshi Premchand

चैप्टर 1 कायाकल्प मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास | Chapter 1 Kayakalp Novel By Munshi Premchand | Chapter 1 Kayakalp Munshi Premchand Ka Upanyas  Chapter 1 Kayakalp Novel By Munshi Premchand दोपहर का समय था; चारों तरफ अंधेरा था। आकाश में तारे छिटके हुए थे। ऐसा सन्नाटा छाया हुआ था, मानो संसार से जीवन का लोप … Read more

चैप्टर 7 प्यार की अजब कहानी फैंटेसी रोमांस नॉवेल | Chapter 7 Pyar Ki Ajab Kahani Fantasy Romance Novel In Hindi 

चैप्टर 7 प्यार की अजब कहानी फैंटेसी रोमांस नॉवेल, Chapter 7 Pyar Ki Ajab Kahani Fantasy Romance Novel In Hindi  Chapter 7 Pyar Ki Ajab Kahani Fantasy Romance Novel In Hindi  ‘कोई प्यार के लिए जान दे देता है और कोई प्यार के लिए जान ले लेता है। कैसा होता है ये प्यार? कैसी होती … Read more

चैप्टर 6 प्यार की अजब कहानी फैंटेसी रोमांस नॉवेल | Chapter 6 Pyar Ki Ajab Kahani Fantasy Romance Novel In Hindi 

चैप्टर 6 प्यार की अजब कहानी फैंटेसी रोमांस नॉवेल, Chapter 6 Pyar Ki Ajab Kahani Fantasy Romance Novel In Hindi  Chapter 6 Pyar Ki Ajab Kahani Fantasy Romance Novel In Hindi  अपने पीछे आहट पाकर अभिराज तेजी से पलटा और हाथ में पकड़ी टॉर्च से सामने वाले पर वार करने को हुआ।  “साहब…मैं हूँ।“ झुककर … Read more