चैप्टर 8 प्यार का पागलपन लव स्टोरी नॉवेल | Chapter 8 Pyar Ka Pagalpan Love Story Novel In Hindi

चैप्टर 8 प्यार का पागलपन लव स्टोरी नॉवेल, Chapter 8 Pyar Ka Pagalpan Love Story Novel In Hindi

Chapter 8 Pyar Ka Pagalpan Love Story Novel In Hindi

Chapter 8 Pyar Ka Pagalpan Love Story Novel In Hindi

साजन और नैना लॉन की भीगी हरी घास पर पड़े हुए थे। नैना का सिर साजन के सीने पर था और साजन ने नैना को अपनी बाहों में भर रखा था। उन्हें उस हाल में देखकर पिया दौड़ती हुई उन तक पहुँची।

“मैं हेल्प करती हूँ दी।“ उसने कहा और नैना की उठने में मदद करने लगी। 

पिया की मदद से नैना उठकर खड़ी हो गई। उसके उठते ही साजन भी उठकर खड़ा हो गया। उसके आधे कपड़े मिट्टी से सने हुए थे और आधे पानी से भीगे हुए थे। नैना के कपड़ों का हाल भी काफ़ी कुछ वैसा ही था।

पिया ने परेशानी भरे लहज़े में पूछा, “ये कैसे हो गया दी?” 

“वो…मैं….” नैना ने बताना शुरू किया, मगर हकला गई।

उसे हकलाता देख साजन बोल पड़ा, “जो हुआ सो हुआ। अब इसका क्या करूं?” उसका इशारा अपने गंदे हो चुके कपड़ों की तरफ था।

“सॉरी!” नैना तिरछी निगाह से उसे देखते हुए बोली।

साजन ने उसे नज़र भरकर देखा, पर कहा कुछ नहीं।

“चलिए, कपड़े साफ़ कर लीजिये।“ पिया ने साजन को अंदर चलने का इशारा किया और तीनों अंदर जाने लगे। उसी समय पिया का मोबाइल फिर बज उठा और वह कॉल रिसीव करते हुए नैना से बोली, “दी प्लीज…इन्हें वाशरूम दिखा दो ना!”

नैना ने ‘हाँ’ में सिर हिला दिया और साजन के साथ घर की तरफ बढ़ गई। जब दोनों घर में दाखिल हुए, तो ड्राइंग रूम में बैठे नरेन्द्र, रानी, रमेश और सलोनी उनकी हालत देखकर हैरान रह गये। रानी ने परेशानी भरे लहज़े में पूछा –

“ये क्या हाल बना रखा है दोनों ने? क्या हुआ?” 

नैना ने डरते-डरते सारा किस्सा सुना दिया। सारी बात जानकर नरेन्द्र ने साजन की तरफ इशारा करके नैना कहा, “कोई बात नहीं! नैना ऐसा करो, साजन को बाथरूम ले जाओ। उसे मेरे कपड़े दे देना…और हाँ उसके कपड़े साफ़ कर देना।“ 

“मैं?” नैना चौंककर चीख पड़ी।

रानी ने उसे घूरकर देखा, तो वह सिर हिलाते हुए साजन से बोली, “चलिये!“

नैना साजन को लेकर अपने कमरे में चली आई और उसे टॉवल देकर बोली, “वो रहा बाथरूम…जाओ जाकर खुद को साफ कर लो।“

“…और कपड़े साफ़ करने के लिए तुम्हें दे दूं।“ कहते हुए साजन के होंठों पर हल्की-सी मुस्कान बिखर गई।

नैना ने उसे घूरकर देखा और मुँह बनाकर बोली, “मैं क्यों साफ़ करूंगी तुम्हारे कपड़े?”

“गंदे तो तुम्हारी वजह से हुए हैं।“

“तो मैंने कहा था तुम्हें कि कपड़े गंदे करो…क्यों गिरने से बचाया…गिरने देते।“ नैना तुनककर बोली।

“वही ठीक होता।“ गहरी साँस भरकर साजन ने कहा और बाथरूम की तरफ बढ़ गया।

“बहुत ज़ुबान चलने लगी है।“ नैना बड़बड़ाई और कबर्ड से अपने कपड़े निकालकर दरवाज़े की ओर बढ़ गई। उसने जैसे ही दरवाज़ा खोला, सामने रानी को खड़ा पाया। उसके हाथ में नरेन्द्र के कपड़े और एक छोटा-सा कैरी बैग था। दोनों नैना के हाथ में थमाकर उसने कहा –

“साजन को दे देना।“

नैना ने कैरी बैग में झांककर देखा, तो मुस्कुरा उठी। वह कैरी बैग लिए पिया के कमरे में चली गई। वहाँ उसने जल्दी से खुद को साफ़ किया, कपड़े चेंज किये और वापस अपने कमरे में आ गई।

साजन अब भी बाथरूम में ही था। नैना ने बाथरूम के दरवाजे पर दस्तक दी।

“कौन है?” अंदर से साजन की आवाज़ आई।

नैना दरवाज़े से मुँह सटाकर बोली, “मैं हूँ…दरवाज़ा खोलो।“ 

“क्या?” साजन तकरीबन चीख पड़ा।

“अरे मेरा मतलब है…थोड़ा-सा खोल दो। कपड़े देने हैं तुम्हें।“ 

साजन ने धीरे-से दरवाज़ा खोला। नैना ने अपना हाथ बढ़ा दिया, जिसमें वो कपड़े और कैरी बैग थामे हुए थी। 

“ये क्या है?” कैरी बैग को देखते हुए साजन ने पूछा।

“क्यों, नहीं पता तुम्हें?” नैना अपनी हँसी दबाते हुए बोली।

तब तक साजन कैरी बैग खोलकर देख चुका था। उसने नज़र उठाकर नैना को देखा और कहा, “पता है, लेकिन किसका है?” 

“पापा का!”

“क्या!!” साजन चीख पड़ा और कैरी बैग दूर फेंक दिया। उस कैरी बैग में अंडरवियर और बनियान था।

“ओफ़्फ़ो!” नैना कैरी बैग उठाकर बोली, “पापा की शॉप का है बाबा। नहीं पता तुम्हें कि पापा की रेडीमेड और अंडरगारमेंट्स की शॉप है। स्टॉक रहता है घर पर। नया है एकदम, बस पैकेट शायद फट गया होगा।“

नैना ने फिर से कैरी बैग बाथरूम के दरवाज़े के सामने बढ़ा दिया, जिसे साजन ने चुपचाप ले लिया और दरवाज़ा बंद कर दिया।

नैना हाथ बांधकर बाथरूम के दरवाज़े से टिककर खड़ी हो गई और तेज आवाज में बोली, ““देखो, फीडबैक दे देना और अपने दोस्तों को भी ज़रूर रिकमेंड करना।“  

“क्यों?” अंदर से साजन की आवाज आई।

“फ़ोकट में तुम्हें इतना हाई क्वालिटी माल मिल रहा है, तो इतना तो करना ही पड़ेगा ना!”

“इस एहसान की ज़रूरत नहीं है। मैं पैसे दे दूंगा। बताओ, कितने का है?”

“अरे! पैसे कैसे ले सकते हैं हम। ये तो हम अहसान उतार रहे हैं, जो तुमने मुझे नीचे कीचड़ में गिरने से बचाकर किया है।“

“एहसान….एहसान के चक्कर में कपड़े उतर गये। वाह…क्या बात है! पहले कपड़े उतारो, फिर एहसान उतारो।“ साजन बड़बड़ाया।

“कुछ कहा तुमने?” 

“मैं किसी का एहसान नहीं लूंगा। नहीं चाहिए मुझे ये कपड़े। मैं ऐसे ही बाहर आ रहा हूँ।“

“नहीं…नहीं…नहीं…ऐसे बाहर मत आना।“ नैना घबराकर बोली और दरवाजे से दूर हट गई।

“मैं तो आ रहा हूँ।“ साजन ने कहा और दरवाज़ा खोल दिया। नैना झट से पलट गई और आँखें बंद कर ली।

साजन बाथरूम से बाहर निकला और नैना के सामने आकर उसके मुँह पर टॉवल फेंककर बोला, “ये रहा तुम्हारा टॉवल…मुझे कोई भी एहसान नहीं चाहिए।“ 

“तुम ऐसे ही तो बाहर नहीं आ गये।“ नैना ने आँखें बंद किये हुए ही पूछा। 

“आँखें खोलकर देख लो और कन्फर्म कर लो।“ 

“मैं सचमुच खोल लूंगी।“

“तो खोल लो।“ 

नैना ने धीरे-से अपनी एक आँख खोली, फिर दोनों खोल ली। सामने साजन सफ़ेद कुर्ते-पैजामे में खड़ा हुआ था। अंडाकार चेहरा, गेंहुआं रंग, ५’१०’’ कद, गठीला बदन, क्लीन शेव, भीगे बिखरे हुए बाल। कुर्ते-पैजामे में वो काफ़ी हैंडसम लग रहा था। नैना उसे देखती रह गई।

नैना को यूं खड़ा देखकर साजन धीरे-धीरे उसके पास गया और उसके सामने खड़े होकर अपना सिर झटक दिया। उसके गीले बालों से छिटकी पानी की बूंदें नैना के गालों को छू गई और मानो वो होश में आई।  

“ऐसे क्या देख रही हो?” साजन ने भौहें उचकाकर पूछा।

“वो…कुर्ते-पैजामे में तुम….” नैना ने हकलाते हुए कहने की कोशिश की, पर कह नहीं पाई।

“कुछ और एक्स्पेक्ट किया था तुमने?” साजन ने उसकी आँखों में आँखें डालकर शरारत से पूछा।

नैना “ना” में सिर हिलाते हुए दो कदम पीछे हट गई।

साजन मुस्कुराते हुए ड्रेसिंग टेबल के पास गया और आईने के सामने खड़ा होकर कंघी करने लगा। 

कंघी करते हुए साजन की नज़र आइने में दिख रही नैना पर थी। उसे देखते हुए ही उसने कहा, “मेरे कपड़े अंदर पड़े हैं। धोकर, प्रेस करके मुझे भिजवा देना। एड्रेस मैं छोड़ जाऊंगा।“

“क्या?” नैना ने चौंककर कमर पर हाथ रख लिया।

साजन पलटकर बोला, “एहसान उतारना है ना मेरा, तो खुद अपने हाथों से धोना और प्रेस करना।“ 

ये कहकर वह कमरे के दरवाज़े की ओर बढ़ गया।

“बदमाश हो गए हो तुम!” नैना वहीं खड़े-खड़े तेज़ आवाज़ में बोली।

“और तुम खूबसूरत!” साजन ने पलटकर कहा।

नैना का मुँह खुला रह गया। साजन पलटकर कमरे से बाहर निकल गया।

नैना वहीं खड़ी सोचती रही – ‘ये क्या हो रहा था हमारे बीच!“

साजन मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर निकला और  सीढ़ियाँ उतरने लगा। जब वह नीचे पहुँचा, तो रानी ने उसके चेहरे की मुस्कराहट देखकर पूछा, “क्या बात है बेटा, क्यों मुस्कुरा रहे हो?”

रानी की बात साजन को हैरान कर गई। अरसे बाद उसके होंठों पर इस तरह मुस्कान बिखरी थी, जो महज़ दिखावे के लिए नहीं थी। दिल की ख़ुशी को खुद में समेटकर होठों पर बिखर गई थी। 

वह सबके साथ जाकर बैठ गया। पिया भी वहीं बैठी थी। सबके साथ बैठे हुए भी साजन खोया-खोया सा था और सोच रहा था – ‘ये आज अचानक मुझे हुआ क्या? मैं तो कभी ऐसे बिहेव नहीं करता…वो भी नैना के साथ….’ यकायक दस साल पहले अपनी खुद की कही बात उसके ज़ेहन में तैर गई – “आई हेट यू नैना खन्ना! आज के बाद कभी अपनी शक्ल मत दिखाना।“

  क्रमश:

क्या हुआ था नैना और साजन के बीच दस साल पहले? क्या दोनों वो बात भूल जायेंगे? क्या नैना वो थप्पड़ भूल जायेगी। जानने के लिए पढ़ते रहिए Pyar Ka Pagalpan Romantic Upanyas 

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Author  – Kripa Dhaani

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