चैप्टर 5 फ़रीदी और लियोनार्ड इब्ने सफ़ी का उपन्यास जासूसी दुनिया सीरीज़ | Chapter 5 Fareedi Aur Leonard Ibne Safi Novel

Chapter 5 Fareedi Aur Leonard Ibne Safi Novel

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अजनबी हसीना

रात बहुत ज्यादा ठंडी थी। आसमान में काले बादल मंडरा रहे थे। हवा तेज थी। कभी-कभी दिल दहला देने वाली गरज और चमक से बड़ी-बड़ी इमारतों में एक अजीब किस्म की झंकार सी पैदा हो जाती थी। एक बज चुके थे, लेकिन फ़रीदी अभी तक अपने सोने वाले कमरे में टहल-टहल कर सिगार पर सिगार फूंक रहा था। थोड़ी देर बाद बारिश होने लगी। फ़रीदी ने खिड़कियां बंद कर दी।

अभी वह लेटने के इरादे से पलंग पर बैठा ही था कि कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनाई दी और ऐसा मालूम हुआ, जैसे कोई बरामदे में गिर पड़ा हो। वह तेजी से बरामदे की तरफ लपका। पोर्टिको में उसके कुत्ते खड़े भौंक रहे थे। फ़रीदी ने उन्हें डांटते हुए बरामदे का बल्ब जलाया।

“अरे..!” वह चौंककर एक कदम पीछे हट गया।

बरामदे में एक औरत औंधी पड़ी हुई थी। उसकी कीमती साड़ी पिंडलियों तक सरक आई थी। उसने गर्म और उम्दा लिबास और ऊपर से लबादा पहन रखा था। पहने कपड़े करीब-करीब बिल्कुल भीग चुके थे।

फ़रीदी उसके करीब जाकर बैठ गया। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें। हिम्मत करके उसने उसे सीधा किया। औरत नौजवान थी। उसकी पलकेंघनी थी, जिनकी गोद में झील की तरह दो आँखें सो रही थी। लाल और गोरा चेहरा कुछ और खूबसूरती पैदा कर रहा था। औरत गहरी-गहरी सांस ले रही थी। उसके खूबसूरत जिस्म में हाथ लगाते वक्त फ़रीदी जैसा सूखा आदमी भी एक बार सिर से पैर तक कांप उठा था।

आखिर वह हिम्मत करके इस बेहोश लड़की को हाथों पर उठाकर अपने कमरे में ले आया और पलंग पर लेटा दिया।

अब वह दूसरी उलझन में पड़ गया था। उसके भीगे हुए कपड़े किस तरह बदले? यह मसला कुछ पेचीदा था। आखिर उसने उसे ज्यों का त्यों रहने दिया। सिर्फ इतना किया कि उसे कंबलों से चारों तरफ से ढक दिया और रूम हीटर से कमरा गर्म करने का इंतज़ाम करने लगा। उसने सोचा कि हमीद को भी जगा दें। लेकिन उसकी बदमज़ाकी का ख़याल आते ही ठहर गया। उसने लड़की के जूते उतार दिए थे और अब उसके नाज़ुक पैरों को देख रहा था।

थोड़ी देर बाद उसकी घनी पलकों के नीचे आँखें खुली। फ़रीदी उस पर झुक गया। औरत धीरे-धीरे होश में आ रही थी। आँखें ज़रा सी खुली और फिर बंद हो गई। फिर उसने आँखें फाड़-फाड़ कर चारों तरफ देखना शुरू कर दिया। अचानक वह झटके के साथ उठ बैठी।

“आप इत्मीनान रखिये। आप बिल्कुल महफूज़ हैं।” फ़रीदी ने कहा।

“लेकिन मैं कहाँ हूँ?” लड़की बोली।

“घबराइए नहीं…आप बुरे लोगों में नहीं।” फ़रीदी ने कहा।

लड़की सिर झुकाये सोचने लगी।

“आप अभी लेटी ही रहिये, तो बेहतर है।” फ़रीदी बोला।

लड़कियों उसे खौफ़ज़दा होकर देखने लगी।

“आप बेकार में परेशान हो रही हैं। इत्मीनान रखिये, आप बिल्कुल महफूज़ हैं।” फरीदी ने उसे फिर दिलासा दिया। लड़की फिर लेट गई।

“आपके कपड़े भीगे हुए हैं।” फ़रीदी ने कहा, “मुझे अफ़सोस है कि मैं आपके लिए जनाना कपड़ों का इंतज़ाम न कर सकूंगा। अगर आप कुछ ख़याल न करें, तो कुछ वक्त के लिए मर्दाना कपड़े पहन लें, जब तक कि आपके कपड़े सूख न जाये।”

लड़की ने कोई जवाब न दिया।

“भीगे कपड़े आपको नुकसान पहुँचा सकते हैं। मेरे ख़याल से आपको इसमें कोई एतराज़ न होना चाहिए।”

लड़की बदस्तूर ख़ामोश रही।

जब वह वापस आया, तो उसके हाथों में उसके सोने वाले कपड़े थे।

“लीजिए, कपड़े बदल डालिये।” फ़रीदी ने कहा, “मैं तो अब चाय का इंतज़ाम करता हूँ।”

“नहीं…आपको बहुत तकलीफ हो रही है।” लड़की जल्दी से बोली।

“नहीं, तकलीफ की कोई बात नहीं। इस समय चाय आपके लिए ज़रूरी है।” फ़रीदी ने कहा और कमरे से चला गया।

लड़की ने उठकर अपने भीगे हुए कपड़े उतारे और फ़रीदी के कपड़े पहन लिये। उन ढीले-ढाले कपड़ों में वह सर्कस के जोकर जैसी मालूम होने लगी थी। कपड़े बदलने के बाद उसने रूम हीटर का प्लग निकाल दिया। फिर पलंग पर अच्छी तरह कंबल ओढ़ कर बैठ गई।

थोड़ी देर बाद फ़रीदी ट्रे में चाय लेकर आया। उसने इतनी रात को नौकरों को जगाना ठीक न समझा। इसलिए उसने चाय खुद ही बना ली थी।

“मुझे सख्त शर्मिंदगी है।” लड़की बोली।

“शर्मिंदगी किस बात की।” फ़रीदी ने कहा।

“बेकार ही में आपको तकलीफ हो रही है।” लड़की बोली।

“भई, इसमें तकलीफ की क्या बात है।” फ़रीदी ने उसकी तरफ चाय की प्याली बढ़ाते हुए कहा।

“शुक्रिया..!” लड़की ने कहा। चाय लेते वक्त उसका हाथ कांप रहा था।

फ़रीदी आराम कुर्सी पर अधलेटा होकर सिगार सुलगाने लगा।

“सिगार के धुएं से आपको तकलीफ तो न होगी?” फ़रीदी ने कहा।

“जी नहीं…बिल्कुल नहीं।” लड़की मुस्कुराकर बोली।

“मेरे ख़याल से आप एक कप और पीजिये।”

“जी नहीं बस…शुक्रिया!”

“आप तकल्लुफ कर रही हैं।” फ़रीदी ने हँसकर कहा और उसके कप में चाय उड़ेलने लगा।

“तो आप भी पीजिये।” लड़की ने कहा।

“मेरे लिए बिल्कुल नाकाफ़ी हो जायेगी।” फ़रीदी ने कहा।

लड़की चाय पी चुकी थी। उसके चेहरे से ऐसा मालूम हो रहा था, जैसे वह कुछ कहना चाहती हो।

फ़रीदी आँखें बंद किए ख़ामोशी से सिगार पी रहा था।

“मगर… मगर..!” लड़की ने कहा, “मुझे हैरत है कि आपने अभी तक मेरे बारे में कुछ नहीं पूछा।”

फ़रीदी आँखें खोलकर मुस्कुराया।

“अगर आप ज़रूरी समझेंगी, तो खुद-ब-खुद बता देंगी।” फ़रीदी ने कहा।

लड़की उसे हैरत से देखने लगी।

“क्या यह फ़रीदी साहब का मकान नहीं है?” लड़की ने पूछा।

“सौ फ़ीसदी उन्हीं का है।” फ़रीदी ने कहा और सिगार के हल्के-हल्के कश लेने लगा।

“क्या फ़रीदी साहब इस वक्त मौजूद हैं?” लड़की ने पूछा।

“जी हाँ!”

“शायद सो रहे होंगे…” लड़की ने कहा, “अगर उन्हें इस वक्त जगाया जाये, तो वह बुरा तो न मानेंगे।”

“बिल्कुल नहीं..!” फ़रीदी ने मुस्कुराकर कहा, “उन्होंने बिल्कुल बुरा नहीं माना।”

“तो क्या आपने उन्हें मेरे बारे में बता दिया है?” लड़की बोली।

“बताना कैसा? वह काफ़ी देर से आपको देख रहे हैं।” फ़रीदी ने कहा।

“ओह…तो क्या वह करीब ही के कमरे में है।” लड़की बेताबी से बोली, “ख़ुदा के लिए मुझे उनके पास ले चलियर।”

“आखिर क्यों?”

“यह मैं उन्हीं को बताऊंगी।” लड़की ने कहा, “माफ़ कीजिएगा, बात ही कुछ ऐसी है।”

“तो बयान करना शुरू कर दीजिये।”

“मैंने कहा ना कि मैं यह बात सिर्फ उन्हीं को बता सकती हूँ।” लड़की ने थोड़ी दबी आवाज में कहा।

“बुरा मानने की बात नहीं।” फ़रीदी ने कहा, “मैं आपसे कब कहता हूँ कि आप किसी दूसरे को बतायें।”

“तो क्या…तो क्या…आप ही फ़रीदी साहब हैं?”

“जी..!”

“ओह…तब माफ कीजिएगा। मुझे गलतफहमी हुई थी। मैं आपको बूढ़ा समझती थी।”

“आप अब भी मुझे बूढ़ा ही समझिये।” फ़रीदी ने कहा, “फ़रमाइए, मैं आपकी क्या खिदमत कर सकता हूँ?”

लड़की कुछ सोचने लगी। उसका चेहरा बार-बार शर्म से लाल हो जाता था। फ़रीदी उसके चेहरे की तब्दीलियों को गौर से देख रहा था।

“मैं दरअसल इसलिए आई।” लड़की इससे ज्यादा न कह सकी। शर्म से उसके चेहरे पर पसीना आ गया था।

“कहिए कहिए…मेरा सीना राजों का मकबरा है, आप इत्मीनान रखिये।” फ़रीदी ने कहा।

“मेरी समझ में नहीं आता कि कैसे कहूं।” लड़की ने कहा।

“यह तो ज़रा मुश्किल चीज है। भला मैं कैसे बता सकता हूँ कि आप कैसे कहें?”

लड़की फिर सोचने लगी।

“आप मेरे ऊपर पूरा-पूरा भरोसा कर सकती हैं।” फ़रीदी ने कहा।

लड़की उसकी तरफ गौर से देखने लगी।

“आप रोज़नामा न्यूज़ स्टार पढ़ते हैं?” लड़की अचानक बोली।

फ़रीदी चौंक पड़ा। लेकिन उसने फौरन ही अपनी हालत पर काबू पाते हुए कुछ ऐसा अंदाज़ अपनाया, जैसे उसने कोई ख़ास बात न पूछी हो। उसके दिल में शक जाग गया, कहीं यह लड़की लियोनार्ड के गिरोह से तो ताल्लुक नहीं रखती। कहीं वह उसे बदनाम करने के लिए कोई दूसरी चाल तो नहीं चल रही है।

“पढ़ता हूँ।” फ़रीदी ने कहा, “हमारे शहर में उसके अलावा दूसरा अखबार ही कौन सा है, जो पढ़ने जाने के काबिल हो।”

“आपने उसमें वह इश्तहार जैसी धमकियाँ भी पढ़ी होंगी, जो आए दिन चंद जानी-मानी हस्तियों के बारे में छपा करती हैं।”

“इश्तहार जैसी धमकियाँ?” फ़रीदी ने ताज़्जुब से कहा, “मैं आप का मतलब नहीं समझा।”

“अरे वही ब्लैकमेलिंग के इश्तहारों के नमूने।” लड़की बोली।

“अच्छा वो!” फ़रीदी ने लापरवाही से कहा, “हाँ पढ़े तो है!”

“उनके बारे में आपका क्या ख़याल है?”

“ख़याल…हाँ दिलचस्पी के लिए अच्छा है।”

“दिलचस्पी!” लड़की जोश में बोली, “मगर मैं साबित कर सकती हूँ कि उनके जरिये सौ फीसदी ब्लैकमेंलिंग हो रही है।”

“अच्छा!” फ़रीदी ने हैरत से कहा।

“जी हाँ!”

“लेकिन कैसे?”

“उसी अखबार की कटिंग देखिये।” लड़की ने उसकी तरफ कागज का एक टुकड़ा बढ़ाते हुए कहा।

फ़रीदी उसे पढ़कर उसकी तरफ गौर से देखने लगा।

“वह बदनसीब नवाबजादी मैं ही हूँ।” लड़की रूंधी हुई आवाज में बोली।

“अच्छा!” फ़रीदी ने हैरत से कहा, “लेकिन यह आप कैसे कह सकती हैं?”

“इसलिए कि बिल्कुल इसी किस्म का खत मुझे स्विजरलैंड में भी मिला था और इसी के साथ एक तस्वीर भी थी।”

“तो क्या यह प्राइवेट सेक्रेटरी वाला मामला सच है?” फ़रीदी ने कहा, “मगर नहीं, मैं क्यों यह पूछ रहा हूँ? माफ़ कीजियेगा।”

“आप बिल्कुल पूछ सकते हैं, बल्कि मैं आपको वह तस्वीर भी दिखा सकती हूँ।” लड़की जोश में बोली, “जब कर नहीं तो डर नहीं! मेरा ज़मीर इस पर मेरी मलामत नहीं करता।” लड़की ने एक तस्वीर फ़रीदी की तरफ बढ़ा दी।

“क्या कहा आपने?” फ़रीदी ने ताज़्जुब और तंज़ भरे लहज़े में कहा, “कि आपका ज़मीर आपकी मलामत नहीं करता है?”

“जी हाँ!” लड़की तेज आवाज में बोली, “स्विजरलैंड के एक पार्क में सिर में चोट लगने की वजह से मैं बेहोश हो गई थी। मेरा प्राइवेट सेक्रेटरी मेरे साथ था। वह मुझे उठाकर अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी की तरफ ले जा रहा था कि उसी दौरान किसी ने मेरा फोटो खींच लिया और बस!”

“ओह समझा..!” फ़रीदी ने मानीखेज़ अंदाज़ में सिर हिलाकर कहा, “फिर आप मुझसे क्या चाहती हैं?”

“मैं बीस करोड़ कहना से लाऊंगी।’ लड़की ने कहा।

“तो फिर मैं इस सिलसिले में आपकी क्या मदद कर सकता हूँ?” फ़रीदी ने कहा।

“किसी तरह मुझे इस मुसीबत से बचाइये।” लड़की ने बेबसी से कहा, “अगर वाकई यह तस्वीर छप गई, तो मैं किसी को मुँह दिखाने के काबिल नहीं रह जाऊंगी। ऐसी सूरत में मेरे ज़मीर की सफाई भी मेरी मदद न कर सकेगी। दुनिया की ज़बान को कौन रोक सकता है? तो फिर अब्बाजान तो मुझे ज़िन्दा ही दफ़न कर देंगे।”

“अच्छा…आपने इस अखबार के दफ्तर वालों से इस सिलसिले में कोई खतो-किताबत भी की?” फ़रीदी ने पूछा।

“अभी नहीं!” लड़की ने कहा, “सबसे पहले मैंने यह मुनासिब समझा कि आपसे मिल लूं। एक दिन अशोकनगर के नवाज वजाहत मिर्जा अब्बाजान से आपकी बहुत तारीफ कर रहे थे। मैंने बात ही बातों में उनसे आप का पता पूछा और यहाँ चली आई।”

“यह आपने बहुत अच्छा किया। अगर आपने इससे पहले कुछ खतो-किताबत की होती, तो इतनी आजादी से यहाँ तक नहीं पहुँच सकती थी।”

“क्यों?”

“आपके पीछे आदमी लग गए होते।”

“अच्छा…!”

“जी हाँ!” फ़रीदी ने कहा, “आप यहाँ कहाँ रहती हैं?”

“फिलहाल न मैं आपको अपना नाम बताऊंगी और न घर का पता।”

“मैं इसके लिए आपको मजबूर नहीं करूंगा।” फ़रीदी ने कहा, “लेकिन मैं किस तरह यकीन कर लूं कि आप वही नवाबजादी हैं। हो सकता है कि आप उसी गिरोह से ताल्लुक रखती हों, जिसके खिलाफ आप शिकायत लेकर आई हैं।”

“आपका एतराज दुरुस्त है।” लड़की ने कहा, “वाकई ऐसे सूरत में इसका सबूत मैं आपको नहीं दे सकती।”

फ़रीदी को सोचने लगा। लड़की की सादगी का अंदाजा उसे इस बात पर मजबूर कर रहा था कि उसके बयान को सही मान ले। उसकी खूबसूरत आँखों में उसे ज़र्रा बराबर मक्कारी की सूरत न दिखाई दी।

“देखिए…मुझे मायूस न कीजियेगा।” लड़की भर्रायी हुई आवाज़ में बोली।

“आखिर आपको अपने बारे में साफ तौर पर बताने में क्या नुकसान है?” फ़रीदी ने कहा।

“मैं अपने खानदान की बदनामी नहीं चाहती।” लड़की बोली, “इससे बेहतर तो यही होगा कि मैं खुदकुशी कर लूं।”

“आप इत्मीनान रखिए कि यह चीज मुझ तक ही महदूद रहेगी।” फ़रीदी ने कहा।

लड़की सोच में पड़ गई।

“आपने नवाब रशीदुज्जमा का नाम सुना है।” लड़की धीरे से बोली।

“ओह तो कहिए, आप गज़ाला खानम हैं।” फ़रीदी मुस्कुराकर बोला।

“आपको कैसे मालूम हुआ?” लड़की अचानक चौंक कर बोली।

“मैंने आपके बारे में नवाब वजाहत मिर्जा के लड़के डॉक्टर शौकत से सुना था।”

“तो क्या आप लोगों को जानते हैं?”

“अच्छी तरह!”

“खैर छोड़िए इन बातों को।” लड़की बोली, “अब बताइए आप मेरे लिए कुछ करेंगे या नहीं?”

“आखिर आप क्या चाहती हैं?”

“मैं चाहती हूँ कि किसी तरह वह तस्वीर नेगेटिव समेत मुझे मिल जाये!”

“मैं कोशिश करूंगा। लेकिन आपको उस वक्त ठहरना पड़ेगा, जब तक कि आपको तस्वीर वापस न मिल जाये।”

“मैं तैयार हूँ।”

“दूसरी बात यह कि कल ही आप उस नामालूम आदमी को उसी अखबार के जरिये खत लिखिये और उससे पूछिए कि उसे रकम कैसी पहुंचाई जाए। आप इतना कर लीजिए, बाकी मैं देख लूंगा। खत का जवाब आये, तो उसे मेरे पास भिजवा दीजिएगा। मेरा आदमी आपसे होटल गुलिस्ता में मिलता रहेगा। अब आप यहाँ न आइएगा और न किसी पर यह ज़ाहिर कीजिएगा कि आप मुझसे मिल चुकी हैं।”

“मैं इस सिलसिले में बिल्कुल किसी को कुछ नहीं बताऊंगी।” लड़की ख़ुश होते हुए बोली, “मैं आपका एहसान ज़िन्दगी भर नहीं भूलूंगी।”

“खैर यह सब बाद की बातें हैं।” फ़रीदी ने कहा, “चलिए, मैं आपको होटल गुलिस्ता तक छोड़ आऊं।”

“इस तकलीफ का बहुत-बहुत शुक्रिया।” लड़की उठती हुई बोली।

“अभी आपके कपड़े नहीं सूखे।” फ़रीदी ने कहा, “मेरे ख़याल से आप इन्हीं कपड़ों पर मेरा ओवर कोट पहन लीजिए। हालांकि आप मजाकिया जरूर लगेंगी, पर क्या किया जाये।”

“मुझे इसकी परवाह नहीं।” लड़की बोली, “खुद को दिखाने से ज्यादा मुझे अपने आराम और तकलीफ का ख़याल रहता है।”

“यही होना चाहिए।” फ़रीदी ने कहा, “अच्छा आप इस ओवर कोट को पहनिये। मैं जाकर गैरेज से गाड़ी निकालता हूँ।”

रास्ते में लड़की ने महसूस किया कि फ़रीदी की जगह कोई और ड्राइव कर रहा है। वह ठिठकी ही थी कि आवाज़ आई।

“घबराइए नहीं! मैंने अपने असली शक्लो सूरत में आपके साथ जाना ठीक न समझा।“

लड़की खामोशी से सीट पर टेक लगा कर बैठ गई। आसमान पर अभी तक काले काले बादल मंडरा रहे थे। बारिश कुछ कम हो गई थी।

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