चैप्टर 4 जाने तू जाने ना बिलियनर रोमांस नॉवेल | Chapter 4 Jane Tu Jane Na Billionaire Romance Novel In Hindi

चैप्टर 4 जाने तू जाने ना बिलियनर रोमांस नॉवेल, Chapter 4 Jane Tu Jane Na Billionaire Romance Novel In Hindi By Kripa Dhaani 

Chapter 4 Jane Tu Jane Na Billionaire Romance Novel 

Chapter 4 Jane Tu Jane Na Billionaire Romance Novel 

मोनिका दिल ही दिल में बहुत खुश थी। उसे लग रहा था कि अपनी हॉटनेस से सालों बाद हुई इस मुलाकात में उसने देव को अपना बना लिया है और अब उसका मिसेज देव खुराना बनना तय है।

“देव!” गहरी साँस भरकर उसने कहा और अपने होंठ काटकर आँखें बंद कर ली।

ठीक उसी वक्त देव की केबिन का दरवाजा धड़ाक से खुला और अंशुमन फाइल पकड़े अंदर दाखिल हुआ।

“शाह एंड शाह ग्रुप की फाइल सर!” 

अंदर आते ही अंशुमन की नज़र जिस नज़ारे पर पड़ी, उसे देखकर उसकी आँखें फट सी गई। वह आँखें फाड़े मिनी ड्रेस में देव के ऊपर लेटी आफ़त की परकाला को देखता रहा। देव अंशुमन को देखकर मानो होश में आया और मोनिका को खुद से दूर कर खड़ा हो गया।

“मैं बाद में आऊं सर!” अंशुमन नज़रें चुराते हुए देव से बोला।

“नहीं!” देव ने सिर हिलाया, फिर मोनिका को देखकर कहा, “आउट!”

“व्हाट!” मोनिका चौंक गई।

“तमीज़ से दफ़ा हो जाओ। वरना धक्के मारकर केबिन से बाहर फेंक दूंगा।” देव ने आँखें तरेरकर कहा।

मोनिका पैर पटकते हुए केबिन से बाहर निकल गई। अंशुमन हैरान होकर देव को देखता रह गया। 

देव अंशुमन के हाथ से फाइल लेकर अपनी चेयर पर जाकर बैठ गया और परेशान अंदाज़ में बोला, “टिया की दूरी मुझे पागल करने लगी है पीए। मुझे हर लड़की में टिया दिखाई देने लगी है। मैं क्या करूं?”

“उन्हें कॉल कर लीजिये सर।” अंशुमन ने सुझाया।

“वो कॉल नहीं उठाती। अब क्या करूं?”

“फ़िलहाल शाह एंड शाह ग्रुप की मीटिंग की तैयारी कीजिए सर। मैं कुछ सोचता हूँ।”

“हूं!” देव मीटिंग फाइल पढ़ने में डूब गया। अंशुमन केबिन से बाहर निकल गया।

उस दिन देव की शाह एंड शाह ग्रुप के साथ मीटिंग काफ़ी अच्छी रही। मीटिंग के बाद वह सीधा घर चला गया। 

सिमी भी पूरे दिन काम में बिजी रही। शाम को जब वह घर पहुँची, तो थककर चूर थी। आज का दिन मिक्स फ़ीलिंग्स वाला था उसके लिये। जहाँ एक तरफ श्याम आहूजा की डांट थी, तो दूसरी तरफ साहिल का रोमांटिक अवतार था और वो अनजान शख्स भी था, जो दो बार उससे टकराया था, जिससे मिलकर सिमी को क्या महसूस हुआ था, वो समझ नहीं पाई थी, पर कुछ तो हुआ था। कुछ ऐसा, जो अक्सर अजनबियों से मिलकर महसूस नहीं हुआ करता। 

सिमी महाराष्ट्र के नासिक जिले के डिंडोरी टाउन की रहने वाली थी। मगर कुछ सालों से जॉब के सिलसिले में मुंबई में अकेले रहा करती थी। भूख लगने पर अक्सर उसे माँ के हाथ के खाने की याद आ जाती। माँ थोड़ी गुस्से वाली थी। अकेले घर परिवार और बच्चों की ज़िम्मेदारी ने उन्हें ज़रा कड़क मिज़ाज़ बना दिया था। मगर दिल में प्यार बेशुमार था, बस थोड़े एटीट्यूड के साथ बाहर आया करता था।

सिमी का खाना बनाने का मूड नहीं था। वह मन ही मन माँ को याद कर रही थी कि काश माँ यहाँ होती, तो उसे कभी खाना बनाने की फ़िक्र करने की ज़रूरत ही नहीं रहती। उसे माँ की याद आई और मोबाइल स्क्रीन पर ‘मेरी सोना माँ’ चमकने लगा। सिमी की माँ का नाम सोनमणि था – ‘सोनमणि अरोड़ा। सिमी उन्हें प्यार से ‘सोना माँ’ पुकारा करती थी।

“हलो…सोना माँ!”

“खाना खा लिया सिमी?” सोनमणि ने सीधे सवाल दागा। वह सिमी की आदत से अच्छी तरफ वाकिफ़ थी। खाने के मामले में टालमटोल! 

“बनाऊंगी सोना माँ!”

“क्या? मैगी?”

सिमी मुस्कुरा उठी, “मेरे दिल की बात आप कैसे समझ जाती हो माँ?”

“क्योंकि जानती हूँ कि मेरी आलसी और कामचोर बेटी मैगी पर ही ज़िंदा है।”

“कामचोर मत बुलाओ माँ!” सिमी ने उदास होकर कहा। ‘कामचोर’ शब्द सुनकर उसे श्याम आहूजा की डांट याद आ गई। कितना बुरा लगा था उसे! अब धीरे-धीरे वो उस बात को भूल रही थी कि माँ ने अनजाने में उसे फिर सब याद दिला दिया।

“तो पूरा खाना बनाकर खाया कर।” सोनमणि ने कहा।

“आप मेरे पास आ जाओ ना माँ!”

“और अपने होटल का क्या होगा?”

“होटल नहीं, ढाबा है वो माँ! कितना चलता है? आपको भी पता है। आधे कस्टमर तो आपके रिश्तेदार और जान पहचान वाले हैं, जो दबाकर खाते हैं और हाथ झुलाकर चलते बनते हैं। उसे बेच क्यों नहीं देती! पता है जॉर्ज अंकल उसे खरीदने में कितने इंटरेस्टेड हैं।”

“देख, तू उस अंकल जॉर्ज से दूर रहा कर। जब देखो मेरे होटल पर नज़र गड़ाये रहता है बुड्ढा। कभी मेरे सामने आ जाये ना, तो उसकी ऐसी बैंड बजाऊंगी कि याद रखेगा।” 

सिमी हँस पड़ी, “तुम तो नाहक ही उनसे चिढ़ रही हो माँ। वो बहुत अच्छे हैं। मुझे अपनी बेटी मानते हैं।“

“तो मेरे होटल के साथ-साथ मेरी बेटी को भी छीनने पर उतारू है वो बुड्ढा…!”

“माँ…वो बहुत ही अच्छे हैं…वो मुझे इतने प्यार से ट्रीट करते हैं कि यूं लगता है मानो मेरे अपने पिता हैं।”

“अब तू उसे बाप बनाने पर तुल गई।”

सिमी ज़ोर से हँस पड़ी, “आईडिया बुरा नहीं सोना माँ! हाँ कहो, तो बात चलाऊं?”

“तूने मुझे समझ क्या रखा है? इस उम्र में उस चाय वाले से शादी करूं मैं…”

“चाय वाले को कम क्यों समझती हो माँ, चाय वाले देश के प्रधानमंत्री होते हैं।”

“तो प्रधानमंत्री से मेरी शादी करवा, तब मेरी हाँ है।”

“फिर तो वो रह गए प्रधानमंत्री…फिर से चाय बेचने की नौबत ही आनी है। इससे से तो कैफ़े डिलाइट के चायवाले ही ठीक हैं। वैसे सोनमणि फर्नांडिस इतना बुरा भी साउंड नहीं करता माँ।” सिमी ने खिलखिला कर कहा।

“बहुत हुआ मज़ाक सिमी!” सोनमणि ने गंभीर होकर कहा, “अभी मेरी नहीं, तेरी शादी की उम्र है। कोई बॉयफ्रेंड है, तो बता दे। नहीं तो मैं किसी को भी पकड़कर तेरी शादी कर दूंगी।”

“जब कोई होगा, तो बता दूंगी।” सिमी ने लापरवाही से जवाब दिया।

“मतलब कोई तो है।”

“मज़ाक कर रही हूँ माँ!”

“मज़ाक कई बार बहुत भारी पड़ता है सिमी। मुंबई में रहती है तू, वहाँ का रंग-ढंग मैं खूब जानती हूँ। बिना शादी के ही लड़का-लड़की साथ रहते हैं। क्या कहते हैं…लिव इन…और कई तो शादी के पहले ही बच्चे भी कर लेते हैं। ये सब हम छोटी जगह के लोगों के लिए नहीं है सिमी। इसलिए पूछ रही हूँ, किसी को पसंद करती है, तो बता दे। शादी करके तेरा घर बसा दूं, तो मुझे चैन पड़े।”

“माँ बात कहाँ से कहाँ पहुंचा दी आपने। अपनी सिमी पर भरोसा रखो। चलो…मैं जा रही हूँ कुछ बनाने…बातों से पेट नहीं भरने वाला।”

“क्या बनायेगी?”

“मैगी!”

“सिमी तू फिर…” सोनमणि उसे डांटने के मूड में आने लगी, तो सिमी ने बात काट दी, “बॉय सोना माँ! कल बात करती हूँ ना!”

माँ से बात करके सिमी का मूड फ्रेश हो गया। अब उसकी भूख और भी बढ़ चुकी थी। ऐसे में दो मिनट वाली झटपट मैगी के अलावा और कोई ऑप्शन भी नहीं बचा था। उसने फटाफट मैगी बनाई और फटाफट ही उसे चट भी कर डाला। बर्तन धोकर जब वह सोने के लिए बिस्तर पर लेटी, तो उसके मोबाइल पर एक मैसेज चमक उठा – 

“सॉरी सिमी!”

ये साहिल का मैसेज था।

सिमी ने रिप्लाई किया, “आप एक बार सॉरी कह चुके हैं साहिल।“

“उस बात के लिए नहीं दूसरी बात के लिये। क्या तुम्हें मेरी वो हरक़त बुरी लगी सिमी?”

सिमी क्या रिप्लाई करे, उसे समझ नहीं आया। उसने सोचा ही नहीं था कि उसे साहिल की हरक़त कैसी लगी थी?

“आप उस बात के लिए परेशान न हों साहिल। डिनर कर लें और एक अच्छी गुड-नाइट स्लीप लें।”

“थैंक्स सिमी! तुमने मुझे रिलैक्स कर दिया। गुड नाइट!”

“गुड नाइट साहिल!”

सिमी यूं ही लेटे-लेटे खुद से सवाल करने लगी कि जब साहिल ने लिफ्ट में उसके क़रीब आकर उसे किस करने की कोशिश की थी, तब उसे कैसा महसूस हुआ था? उसे बुरा तो नहीं लगा था, बल्कि उसका दिल धड़क गया था। बस मूड ऑफ होने के कारण उस वक़्त वो अपने फर्स्ट किस के लिए तैयार नहीं थी। फर्स्ट किस का ख़याल आते ही सिमी के गाल गुलाबी हो गये। फर्स्ट किस उसके लिए बहुत स्पेशल था और वो चाहती थी कि जब भी उसका फर्स्ट किस हो, वो पल उसकी ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत पल हो और वो शख्स उसके लिए सबसे स्पेशल हो, जिसे वो बेइंतहा प्यार करती हो, जो उसे बेइंतहा प्यार करता हो। आज उसे यक़ीन हो गया था कि जल्द ही वो स्पेशल पल उसकी ज़िन्दगी में आने वाला है।

इन खूबसूरत ख़यालों ने उसका मूड बेहतर कर दिया। जब उसने आँखें बंद की, तब भी ये खूबसूरत ख़याल उसके ज़ेहन में थे और था साहिल, जिसके साथ वो इन खूबसूरत पलों को जीना चाहती थी।

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शहर के दूसरे छोर पर एक आलीशान इमारत के लग्जरियस बेड रूम में मखमली बिस्तर पर लेटा देव मोबाइल स्क्रीन पर टकटकी लगाये हुए था, जहाँ टिया की मुस्कुराती फोटो पर उसकी नज़र फिसल रही थी। 

“तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की हो टिया।” वह बुदबुदाया, “और तुम्हें मैं बहुत चाहता हूँ। मैंने सोच लिया है कि इस बार जब तुम मुझसे मिलोगी, तो मैं तुम्हें प्रपोज़ करूंगा। बस तुम जल्द से जल्द इंडिया आ जाओ। उसके बाद मैं तुम्हें कभी वापस जाने नहीं दूंगा। तुम टिया देव खुराना बनकर हमेशा मेरे पास रहोगी।”

उसने एक बार फिर टिया को कॉल किया। कॉल फिर पिक नहीं हुई। गुस्से में उसने फिर से अपनी हथेली का मुक्का बनाया, मगर दोपहर में लगी चोट में हल्का दर्द उठ गया और उसने मुट्ठी खोल दी। वह उस ज़ख्म को देखने लगा और उसके दिमाग में सिमी की कही बात गूंज गई, “खुद को तकलीफ देने से तकलीफ कम नहीं होती, बढ़ जाती है।“ 

कुछ देर बाद उसे टिया का मैसेज आया, “बिजी हूँ। फ्री होकर कॉल करूंगी।“

देव ने नज़र घड़ी की तरफ घुमा ली। रात के बारह बज रहे थे और उसकी आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। उसने अंशुमन का नंबर डायल कर लिया, जो अपने फ्लैट में नरम-नरम बिस्तर पर चादर ताने मज़े से सो रहा था। कान के पास ही रखा उसका मोबाइल ज़ोर से घनघनाया और वह हड़बड़ाकर उठ बैठा। पास ही पड़ा चश्मा आँखों पर चढ़ाकर जब उसने मोबाइल स्क्रीन पर नज़र गड़ाई, तो देव का नाम देखकर अपना सिर धुन लिया, “हो गई रात ख़राब!”

मुँह बनाकर उसने कॉल ले ली, “सर!”

“पीए तुमने तैयारी पूरी कर ली?” देव ने पूछा।

“किसकी सर?”

“जब टिया इंडिया आयेगी, तो मैं उसे प्रपोज़ करने वाला हूँ। जानते तो हो। मैं चाहता हूँ कि वो मोमेंट इतना स्पेशल हो कि वो मना कर ही न पाये। बस मेरी बाहों में समा जाये और कहे आई लव यू देव…आई लव यू!” कहते हुए देव की साँसे गहरी हो गई।

अंशुमन ने दीवार घड़ी की ओर नज़र उठाकर देखा और आँखें घुमाकर मन ही मन सोचने लगा – ‘सर आपको और कोई टाइम नहीं मिला, ये टॉपिक डिस्कस करने का। प्यार में बावले हो गए हो आप, सच्ची और मुझे भी बावला करके छोड़ोगे।“

अंदर ही अंदर वह चिड़चिड़ाने लगा, मगर ऊपर से पूरी शालीनता बरतते हुए बड़े अदब से बोला, “सर! आप बेफ़िक्र रहिये। मैंने पूरी तैयारी कर ली है। मुझ पर भरोसा रखिये। मैं कल ऑफिस में आपको पूरी डिटेल दे दूंगा।“ 

“कोई गड़बड़ हुई, तो मैं तुम्हें नौकरी से निकाल दूंगा पीए।” देव ने उसे धमकी दी। ये पहला मौका नहीं था, जब देव ने उसे धमकी दी थी। वह अक्सर उसे इस तरह की धमकियाँ देता रहता था। हालांकि, ऐसा करने का उसका कोई इरादा नहीं था। अंशुमन को वह अपने पर्सनल असिस्टेंट से ज्यादा दोस्त मानता था। बस उसे लगता था कि अंशुमन को लाइन पर रखने के लिए ये कड़वी घुट्टी पिलाना ज़रूरी है।

“कोई गड़बड़ नहीं होगी सर। जितनी आपको टिया मैम प्यारी है, उतनी मुझे अपनी नौकरी।” अंशुमन ने मीठी ज़ुबान से कहा।

“मुझे टिया की याद आ रही है।”

“उन्हें कॉल कर लीजिए सर।”

“दिन भर से उसे कॉल कर रहा हूँ, पर वो कॉल नहीं उठा रही वो।”

“थोड़ा इंतज़ार कीजिए सर। बिज़ी होंगी। फ्री होंगी, तो कॉल कर लेंगी।”

“पर मुझे अभी उससे बात करने का मन कर रहा है।”

“अब मैं इसमें क्या कर सकता हूँ सर। मैं टिया मैम तो हूँ नहीं कि आपसे बात करूं।”

“तो बन जाओ।” देव ने ऑर्डर देने वाले अंदाज़ में कहा।

अंशुमन बिदक गया, “नो सर…प्लीज नो सर…मुझसे रोल प्ले करने को मत कहना सर। मैं अंशुमन हूँ, अंशु नहीं।” 

“कल से तुम्हारी नौकरी की छुट्टी!” 

“आप ये ठीक नहीं कर रहे सर!”

“क्विक!”

अंशुमन मन मारकर रोल प्ले में उतर गया, “हलो देव! यू मिस मी ना!” उसने लड़की की आवाज़ बनाकर कहा।

“ओह…टिया आई मिस यू…आई लव यू…आई वांट यू…मुम्ह्हा…मुम्ह्हा….मुम्ह्हा!”

‘एक दिन तेरी इज़्ज़त जायेगी अंशुमन!’ बेचारे अंशुमन ने मन ही मन सोचा और मन मारकर देव की बातें सुनने लगा।

देव अपने दिल का हाल सुनाता रहा, “टिया, तुम कितनी ब्यूटीफुल हो! तुम जैसी इस पूरी क़ायनात में कोई नहीं…कभी आईने में देखा है तुमने खुद को…”

अंशुमन ने करवट बदलकर ड्रेसिंग टेबल के आईने में खुद को देखा। बिखरे बाल, फूले फूले गाल, मोटे मोटे होंठ…उसने चमककर आँखे बंद कर ली और गहरी साँस भरकर बोला, “सच्ची!”

“मुच्ची मेरी जान मुच्ची…तुम्हारी आँखें, तुम्हारे गाल…तुम्हारे लिप्स….तुम इस वक्त मेरे पास होती, तो पता है मैं क्या करता?”

“क…क…क…क्या?” चादर का छोर मुँह में दबाकर अंशुमन ने डरते-डरते पूछा।

“टिया टिया टिया…मैं तुम्हें अपनी बाहों में भरकर तुम्हारे स्ट्रॉबेरी जैसे लिप्स को…”

“सर सर सर…मुझ पर रहम करो…प्लीज…मुझे बख्श दो…।” अंशुमन ने गिड़गिड़ाकर कहा।

“शटअप अंशुमन…टोककर पूरा मज़ा खराब कर दिया…फील आने लगा था मुझे…अब मुझे बीच में टोका, तो नौकरी से निकाल दूंगा।”

अंशुमन ने मोबाइल से अपना सिर ठोंक लिया। देव अपने दिल की भड़ास निकालने लगा। उसका प्रेम पुराण नॉन स्टॉप चलता रहा और अंशुमन दम साधे सुनता रहा। उसकी आँखें नींद से बोझिल हो रही थी और बदन में नींद की ख़ुमारी चढ़ रही थी। कब उसकी आँखें बंद हुई, कब वो नींद के आगोश में समाया, उसे पता ही नहीं चला। नींद गहराती गई और उसके खर्राटे की आवाज गूंजने लगी।

जब देव के कानों से उसके खर्राटे की आवाज टकराई, तो वह चीख पड़ा, “अंशुमन के बच्चे! इस मंथ की तेरी आधी सैलरी कट।“

देव ने कॉल कट की और टिया के बारे में सोचते-सोचते वह कब सो गया, उसे पता ही नहीं चला। रात सपनों में कटने लगी। सपने में वो था, टिया थी और उसके स्ट्रॉबेरी जैसे लिप्स।

उधर सिमी भी सपनों में खोई हुई थी, जिसमें वो थी, साहिल था, उसकी बेचैन नज़रें थीं और था उनका फर्स्ट किस! 

क्रमश:

क्या देव और सिमी के सपने पूरे होंगे? क्या साहिल सिमी को प्रपोज करेगा और क्या देव टिया को प्रपोज कर पाएगा? जानने के लिए पढ़िए Jane Tu Jane Na Upanyas का अगला भाग। 

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Author  – Kripa Dhaani

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