चैप्टर 17 चट्टानों में आग ~ इब्ने सफ़ी का हिंदी जासूसी उपन्यास

Chapter 17 Chattanon Mein Aag Ibne Safi Novel In Hindi

Table of Contents

Chapter 17 Chattanon Mein Aag Ibne Safi Novel In Hindi

Prev | Next | All Chapters

दूसरे सुबह कर्नल ज़रगाम की कोठी के कंपाउंड में गुप्तचर विभाग के डीएस की कार खड़ी दिखाई दी। वह अंदर कर्नल का बयान ले रहा था। इमरान ने रात ही कर्नल को अच्छी तरह पक्का कर लिया था। इस वक्त कर्नल ने वही सब कुछ दोहराया था, जो उसे इमरान ने बताया था। उसने डीएस को बताया कि उसे भी शिफ्टेन का खत मिला था और वह उसी के खौफ़ से उड़न छू हो गया था। फिर उसने डीएस के सवाल का जवाब देते हुए बताया था कि वह इससे पहले भी एक बार शिफ्टेन का शिकार हो चुका है। उस मौके पर उसे पचास हजार से हाथ धोने पड़े थे। लेकिन उसे आज तक यह न मालूम हो सका कि शिफ्टेन किसी एक आदमी का नाम है या किसी भी गिरोह का।

बहरहाल कर्नल ने ली यूका और उसके मामले की हवा भी नहीं लगने दी। पिछली रात की घटना के बारे में उसने बयान दिया कि शिफ्टेन के आदमी उस पर और उसकी लड़की पर हमला करके एक लाख की मांग कर रहे थे कि अचानक इमारत में एक धमाका हुआ। शिफ्टेन के आदमी बदहवास हुए। इस तरह उन्हें निकल आने का मौका मिल गया। चूंकि उसका सेक्रेटरी इमरान पहले ही से सोफ़िया की तलाश में उधर के चक्कर काट रहा था, इसलिए उसने फौरन ही उनकी मदद की।

पता नहीं डीएस उस बयान से मुतमईन भी हुआ या नहीं। बहरहाल, फिर वह ज्यादा देर तक वहना नहीं ठहरा।

सोफ़िया अभी तक खौफ़ज़दा थी। उसने इमरान से पूछा, “इमरान साहब अब क्या होगा?”

“अब नाच गाना सभी कुछ होगा। तुम बिल्कुल फ़िक्र न करो।” इमरान ने कहा।

“क्या आपने सचमुच बम फेंका था?”

“अरे तौबा तौबा!” इमरान अपना मुँह पीटकर बोला, “ऐसी बातें ज़ुबान से न निकालिये, वरना मेरी मम्मी मुझे घर से निकाल देगी।”

सोफ़िया फिर कुछ कहने वाली थी कि कर्नल ने अपने कमरे से इमरान को आवाज दी।

इमरान सोफ़िया को वहीं छोड़कर कर्नल के कमरे में चला गया। कर्नल अकेला था। उसने इमरान के दाखिल होते ही कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया।

“इधर देखो।” कर्नल ने मेज़ की तरफ इशारा किया, जिस पर एक बड़ा सा खंजर पड़ा हुआ था।

“गालिबन…ली यूका की तरफ से धमकी!” इमरान मुस्कुराकर बोला।

“ख़ुदा की कसम तुम बड़े ज़हीन हो।” कर्नल ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कांपती हुई आवाज़ में कहा, “हाँ ली यूका की तरफ से एक खुला ख़त…और यह खंजर…इस कमरे में…मुझे हैरत है कि उन्हें कौन लाया?”

इमरान ने आगे बढ़कर ख़त मेज़ से उठा लिया। ख़त के मजमून के नीचे ली यूका लिखा था।

इमरान ऊँची आवाज़ में ख़त पढ़ने लगा :

‘कर्नल ज़रगाम तुम्हें सिर्फ एक मौका और दिया जाता है। अब भी सोच लो, वरना तुम्हारा एक भतीजा कल शाम तक कत्ल कर दिया जाएगा, तुम उसे चाहे कहीं छुपा दो। इस पर भी तुम्हें होश न आया, तो फिर अपनी लड़की की लाश देखोगे। अगर तुम कागजात वापस करने पर तैयार हो, तो आज शाम को पाँच बजे एक गैस भरा हुआ सुर्ख रंग का गुब्बारा अपनी कोठी के कंपाउंड से उड़ा देना।’

ख़त खत्म करके इमरान कर्नल की तरफ देखने लगा।

“कर्नल डिक्सन मुझसे यही वाकया सुनना चाहता है।” कर्नल ने कहा, “उसे शिफ्टेन वाली दास्तान पर यकीन नहीं आया। समझ में नहीं आता कि शिफ्टेन कौन है और कहाँ से आ टपका।”

“शिफ्टेन!” इमरान मुस्कुरा कर बोला, “कुछ भी नहीं है। उसे ली यूका की सिर्फ एक मामूली से चाल कह लीजिए। उसने यह हरकत सिर्फ इसलिए की है कि आप पुलिस की मदद हासिल कर सकें। ज़रा इस तरह सोचिए। शहर के सारे खाते पीते लोग पुलिस से किसी शिफ्टेन की शिकायत करते हैं। अचानक आप भी पुलिस से मदद मांगते हैं और आप ली यूका की दास्तान सुनाते हैं। नतीजा ज़ाहिर है कि पुलिस शिफ्टेन और ली यूका दोनों को बकवास समझेगी। उससे आप मदद की बजाय यही जवाब पायेंगे कि शहर के किसी सिरफिरे आदमी ने लोगों को परेशान करने के लिए सारा ढोंग रचाया है। क्यों, क्या मैं गलत कह रहा हूँ?”

“तुम ठीक कह रहे हो।” कर्नल कुछ सोचता हुआ बोला, “मगर अब मेरी अक्ल जवाब दे रही है। समझ में नहीं आता कि डिक्सन से क्या कहूं। हम दोनों कई साल तक हम-निवाला और हम-प्याला रहे हैं हमारे बीच में कभी कोई राज राज नहीं रहा…”

“मेरा ख़याल है कि अब आप सब कुछ उसे बता दीजिए और हम सब एक जगह पर बैठ कर आराम से मशवरा करें…घर भर को इकट्ठा कर लीजिए।”

“इससे क्या होगा?”

“हो सकता है कि उनमें से कोई एक सही तदबीर सोच सके।”

“फिर सोचता हूं कि क्यों ना वे कागजात पुलिस के हवाले कर दूं।” कर्नल अपनी परेशानी रगड़ता हुआ बोला।

“सूरत में आप ली यूका के इंतकाम से न बच सकेंगे।”

“यही सोच कर तो रह जाता हूँ।” कर्नल ने कहा, “लेकिन इमरान बेटे, यकीन है कि कागजात वापस कर देने के बाद भी मैं न बच सकूंगा।”

“न सिर्फ आप!” इमरान कुछ सोचता हुआ बोला, “बल्कि वे लोग भी खतरे में पड़ जायेंगे, जो इस वक्त आप का साथ दे रहे हैं।”

“फिर मैं क्या करूं?”

“जो कुछ मैं कहूं, वह कीजिएगा?” इमरान ने पूछा।

“करूंगा!”

“तो बस, अब खामोश रहिएगा। मैं नौकरों के अलावा घर के सारे लोगों को इकट्ठा करके उनसे मशवरा करूंगा। वैसे अगर इस दौरान आप चाहे तो वह फिल्मी गीत गा सकते हैं… क्या बोलते हैं उसके…हाँ… दिल लेकर चले तो नहीं जाओगे हो राजा जी…हो राजा जी!”

“क्या बेहूदगी है?” कर्नल ने झल्लाकर कहा। फिर यकायक हँसने लगा।

Prev | Next | All Chapters

Ibne Safi Novels In Hindi :

कुएं का राज़ ~ इब्ने सफ़ी का उपन्यास

जंगल में लाश ~ इब्ने सफ़ी का ऊपन्यास

नकली नाक ~ इब्ने सफ़ी का उपन्यास

खौफ़नाक इमारत ~ इब्ने सफ़ी का उपन्यास

नीले परिंदे ~ इब्ने सफ़ी का उपन्यास

Leave a Comment