चैप्टर 10 प्यार की अजब कहानी फैंटेसी रोमांस नॉवेल | Chapter 10 Pyar Ki Ajab Kahani Fantasy Romance Novel In Hindi 

चैप्टर 10 प्यार की अजब कहानी फैंटेसी रोमांस नॉवेल | Chapter 10 Pyar Ki Ajab Kahani Fantasy Romance Novel In Hindi 

Chapter 10 Pyar Ki Ajab Kahani Fantasy Romance Novel In Hindi 

Chapter 10 Pyar Ki Ajab Kahani Fantasy Romance Novel In Hindi 

बॉयज टॉयलेट के सामने खड़ा लड़का मुस्कुराते हुए दर्पण को देख रहा था। दर्पण शर्म से पानी-पानी हो रही थी। वह उल्टे पांव सीढ़ियों की तरफ़ भागी। सीढ़ियाँ उतरकर जब वह नीचे पहुँची, तो उस लड़के को वहीं खड़े देखा, जिसने उसे बॉयज टॉयलेट भेजा था। दर्पण का चेहरा गुस्से से लाल था और भागकर नीचे आने की वजह से वह बुरी तरफ हाँफ रही थी।

“मिल ली प्रिंसिपल से? वैसे वहाँ एक नहीं कई प्रिंसिपल रहे होंगे।” लड़के ने हँसते हुए कहा और भाग गया।

सिर झुकाये खड़ी दर्पण बुदबुदाई, “छी! यहाँ के लोग कितने मीन हैं।”

उसी वक़्त उसे ढूंढते हुए शालिनी वहाँ पहुँची और खीझी हुई आवाज़ में बोली, “क्या है दर्पण! हाथ पकड़कर ले जाने पड़ेगा तुमको।” 

दर्पण कोई जवाब नहीं दे पाई। शालिनी ने दर्पण का हाथ पकड़ा और तकरीबन खींचकर अपने साथ ले जाने लगी। दर्पण सिर झुकाये उसके पीछे घिसटती चली गई। उस वक़्त वह बस यही सोच रही थी कि जो उसे देख रहा होगा, पता नहीं उसके बारे में क्या सोच रहा होगा?

कुछ देर बाद दोनों प्रिंसिपल के ऑफिस में बैठी हुई थीं। दर्पण की फाइल पलटते हुए प्रिंसिपल शालिनी से कह रहे थे, “मिस्टर रानावत के कारण मैं इसे अपने स्कूल में एडमिशन दे रहा हूँ। काफ़ी इंसिस्ट किया है उन्होंने। वरना, इस समय एडमिशन क्लोज हो चुके हैं।” 

“थैंक-यू सर!” शालिनी बस इतना ही कह सकी।

“वैसे पिछली क्लास में मार्क्स ठीक हैं। लेकिन यहाँ काफ़ी मेहनत करनी होगी। हमारे स्कूल का स्टैण्डर्ड काफ़ी हाई है। टॉपर्स निकलते हैं यहाँ से और स्कूल का परफॉरमेंस भी १००% रहता है।” प्रिंसिपल ने अपने स्कूल का बखान किया। 

“सर! ये हार्ड वर्क करेगी। लेट ज़रूर हो गई है, पर जो भी कोर्स हो चुका है, उसे जल्दी कवर कर लेगी।” शालिनी ने जवाब दिया।

ये दर्पण की स्कूल लाइफ का लास्ट इयर था, जिसके मार्क्स कॉलेज एडमिशन के लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट होने वाले थे। ऐसे में स्कूल बदलकर पूरी तरह से नये माहौल में आना और वहाँ ढलने के साथ-साथ पढ़ाई में भी बेहतर करना एक बड़ा चैलेंज था उसके लिये। 

‘मुझे ख़ूब मेहनत करनी होगी।’ वह मन ही मन सोचने लगी, ‘काश मुझे यहाँ फ्रेंड्स का ऐसा ग्रुप मिल जाये, जिनके साथ मैं अच्छे से पढ़ाई कर सकूं। पढ़ाई और बस पढ़ाई, पढ़ाई के सिवाय कुछ नहीं।’

सोच तो लिया था दर्पण ने कि पढ़ाई और बस पढ़ाई, लेकिन क्या ऐसा होने था? गॉड नोज़!!

स्कूल की फॉर्मेलिटीज़ पूरी करने के बाद शालिनी और दर्पण हॉस्टल पहुँचे। वहाँ की भी तकरीबन सारी फॉर्मेलिटीज़ पूरी हो चुकी थी। स्कूल फीस के साथ-साथ हॉस्टल और मेस फीस अकाउंट सेक्शन में पहले ही जमा की जा चुकी थी। 

हॉस्टल वार्डन से मिलकर शालिनी ने दर्पण के कमरे की चाभी ली और वो दोनों कमरे में आ गईं। दर्पण के साथ उस कमरे को शेयर करने वाली लड़की उस वक़्त स्कूल गई हुई थी। अंदर घुसने के बाद दोनों ने कमरे में सरसरी नज़र डाली। दो लोगों के हिसाब से कमरा पर्याप्त बड़ा था। कमरे की एक दीवार से अटैच बड़ा सा कबर्ड था, जिसका एक साइड दर्पण का था, दूसरा उसकी रूममेट का। दो स्टडी टेबल्स थे, दो छोटे रैक्स थे, बीच में दो बेड। खिड़की से बाहर झांकने पर जंगल का नज़ारा दिखाई पड़ता था। इस तरह के माहौल में दर्पण कभी रही नहीं थी। पर अब उसे इसकी आदत डालनी थी। 

“आओ तुम्हारा सामान सेट कर लें।” शालिनी दर्पण से बोली।

“नहीं मैं ख़ुद अपने हिसाब से कर लूंगी।” दर्पण ने जवाब दिया।

“तो ठीक है, तुम्हारे अभि अंकल के घर चलते हैं। वैसे भी लंच टाइम हो रहा है।” शालिनी ने कहा और दोनों हॉस्टल से निकलकर अभिराज के घर की तरफ रवाना हो गये।

उस वक़्त घर पर डिम्पल और प्रिया थी। दोनों ने बड़ी ही गर्मजोशी से शालिनी और दर्पण का स्वागत किया। 

“कितने साल बाद मिल रहे हैं शालू!!” डिम्पल ने शालिनी को गले लगाते हुए कहा। फिर दर्पण को अपने सीने से चिपकाते हुए बोली, “अरे मेरी छोटी सी गोलू-मोलू दर्पण कितनी बड़ी हो गई है।”

“प्रिया भी तो काफ़ी बड़ी हो गई है। अच्छी लग रही हो बेटा, अपनी मम्मा पर गई हो।” शालिनी प्रिया से गले मिलने के बाद उसके सिर को सहलाते हुए बोली।

“आंटी आप बिल्कुल नहीं बदले। वैसे के वैसे ही हो। क्या राज़ है आंटी कि आपकी उम्र बढ़ती ही नहीं।” प्रिया ने मुस्कुराते हुए शालिनी की तारीफ़ की।

“निशा जैसी शैतान और बदमाश इनके घर नहीं है ना इसलिए।” जवाब डिम्पल ने दिया। निशा का ज़िक्र सुनकर शालिनी को उसकी याद आई –

“अरे हाँ, निशा कहाँ है?”

“स्कूल गई है आंटी। आप लोग आने वाले हैं, ये पता चलने के बाद तो वो स्कूल जाना ही नहीं चाहती थी। मगर मम्मी ने धक्के देकर उसे स्कूल भेज दिया। उसे बस स्कूल न जाने का बहाना चाहिए।” प्रिया ने निशा की पोल-पट्टी खोली। शालिनी हँस पड़ी। दर्पण निशा के बारे में सोचने लगी। वह बचपन में उससे मिली थी, मगर इस वक़्त उसकी कोई याद उसके ज़ेहन में बाकी नहीं थी। 

“चलो, अब बाकी बातें लंच करते-करते होंगी। तुम लोग फ्रेश हो जाओ शालू। फिर तो आज खूब बातें-शातें होनी हैं। प्रिया बेटा, चलो आंटी और दर्पण को गेस्ट रूम दिखा दो।” डिम्पल ने बातों के सिलसिले पर विराम लगाकर कहा और प्रिया उन्हें गेस्ट रूम ले गई।

लंच के बाद शालिनी डिम्पल के साथ गप्पे मारने लगी और दर्पण कुछ देर प्रिया से बात करके उसके कमरे में ही सो गई। 

शाम को दर्पण सोकर उठी और सीधे नीचे चली आई। बाहर लॉन में शालिनी, डिम्पल और प्रिया कुर्सियाँ डाले बैठी हुई थीं। दर्पण अहिस्ता क़दमों से चलकर उनके क़रीब पहुँची। जैसे ही सबकी नज़र उस पर पड़ी, उनकी हँसी छूट गई।

उनकी हँसी दर्पण को हैरान कर गई, उसे कुछ समझ नहीं आया। तब प्रिया ने अपने मोबाइल का फ्रंट कैमरा ऑन कर उसे थमा दिया, जिस पर नज़र डालते ही दर्पण का मुँह खुला का खुला रह गया। सब फिर हँस पड़े। दरअसल, दर्पण के चेहरे पर किसी ने दाढ़ी-मूँछ बना दी थी।

“ये किसने किया?” दर्पण रोआंसी होकर बोली।

“और कौन होगी, वो रही शैतान।” प्रिया ने एक तरफ इशारा किया और सबकी नज़र उस तरफ घूम गई। 

क्रमश:

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Author  – Kripa Dhaani

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क्या दर्पण और निशा में दोस्ती होगी? क्या दर्पण को पढ़ने वाला ग्रुप मिलेगा? और ऐसा कौन है, जिससे दर्पण की मुलाक़ात होने वाली है? जानने के लिए पढ़िए अगला भाग।

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