आखिरी पत्ता ओ. हेनरी की कहानी | The Last Leaf Story By O Henry In Hindi

प्रस्तुत है – आखिरी पत्ता ओ. हेनरी की कहानी (The Last Leaf Story By O Henry In Hindi). Akhiri Patta O. Henry Ki Kahani  दो सहेलियों और एक चित्रकार की भावनात्मक कहानी है. The Last Leaf Story By O Henry In Hindi वाशिंगटन चौक के पश्चिम की ओर एक छोटा-सा मुहल्ला था, जिसमें टेढ़ी-मेढ़ी गलियों … Read more

दुःख अंतोन चेख़व की कहानी | The Lament Story In Hindi By Anton Chekhov

दुःख अंतोन चेख़व की कहानी (The Lament Story By Anton Chekhov In Hindi) Dukh Anton Chekhov Ki Kahani एक व्यथित वृद्ध व्यक्ति की कहानी है, जो अपने ह्रदय का दुःख और व्यथा किसी से कहकर अपना जी हल्का करना चाहता है.  मगर किसी को उसकी परवाह नहीं!  The Lament Story By Anton Chekhov Hindi Translation … Read more

एक छोटा सा मज़ाक ~ अंतोन चेख़व की कहानी | A Joke Story By Anton Chekhov In Hindi

A Joke Story By Anton Chekhov In Hindi   सर्दियों की ख़ूबसूरत दोपहर…सर्दी बहुत तेज़ थी। नाद्या ने मेरी बाँह पकड़ रखी थी। उसके घुंघराले बालों में बर्फ़ इस तरह जम गई थी कि वे चांदनी की तरह झलकने लगे थे। उसके होंठों के ऊपर भी बर्फ़ की एक लकीर-सी दिखाई देने लगी थी। हम … Read more

मछुए की बेटी ~ सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी

Machhuye Ki Beti Story By Subhadra Kumari Chauhan सुभद्रा कुमारी चौहान की संपूर्ण कहानियों का संग्रह ~ click here चौधरी और चौधराइन के लाड़ प्यार ने तिन्नी को बड़ी ही स्वच्छन्द और उच्छृङ्खल बना दिया था। वह बड़ी निडर और कौतूहल-प्रिय थी। आधी, रात, पिछली पहर, जब तिन्नी की इच्छा होती, वह नदी पर जाकर … Read more

राही ~ सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी | Rahi Subhdra Kumari Chauhan Ki Kahani 

राही सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी (Rahi Subhdra Kumari Chauhan Ki Kahani) Rahi Kahani भूख के कारण चोरी करने पर मजबूर गरीबों की व्यथा प्रस्तुत करती है. सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपनी रचना में देशभक्ति, मानवता, दरिद्रता, सत्ता के प्रति लोभ आदि पहलुओं को छुआ है. पढ़िये : Rahi Subhdra Kumari Chauhan Ki Kahani  “तेरा … Read more

मंझली रानी ~ सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी

Manjhli Rani Subhdra Kumari Chauhan Ki Kahani  (१) वे मेरे कौन थे? मैं क्या बताऊं? वैसे देखा जाए, तो वे मेरे कोई भी न थे. होते भी तो कैसे? मैं ब्राह्मण, वे क्षत्रिय; मैं स्त्री, वे पुरुष; फिर न तो रिश्तेदार हो सकते थे और न मित्र. आह ! यह क्या कह डाला मैंने ! … Read more