तेनालीराम की कहानियाँ 


राजा की चुनौती 

18 September 2017

राजा कृष्णदेव राय और तेनाली राम वार्तालाप कर रहे थे. अचानक उनके मध्य झूठ बोलने के विषय पर चर्चा चल पड़ी. तेनाली राम ने राजा से कहा कि लोगों को जब भी मौका मिलता है, वे झूठ बोल देते हैं. राजा कृष्णदेव राय तेनाली राम की इस बात से सहमत नहीं थे.


तेनाली राम की चित्रकला

10 September 2017

विजयनगर के महाराज कृष्णदेव राय अपने महल की दीवारों पर चित्रकारी करवाना चाहते थे. उन्होंने यह जिम्मेदारी एक चित्रकार को सौंपी. चित्रकार ने महल की दीवारों पर बहुत से चित्र बनाये. जिसने भी उन चित्रों को देखा, उसकी भरपूर प्रशंषा की.


कुएं का विवाह 

12 August 2017

एक बार राजा कृष्णदेव राय और तेनाली राम के मध्य किसी विषय पर बहस हो गई. बहस इतनी बढ़ गई कि तेनाली राम रूठ गए और नगर छोड़कर कहीं चले गए. कई दिन बीत जाने के उपरांत भी जब तेनाली राम नहीं लौटे, तो राजा को उनकी याद सताने लगी. उन्होंने अपने सैनिकों को आदेश दिया…


दोषी कौन?

14 July 2017

राजा कृष्णदेव राय का दरबार लगा हुआ था. तेनालीराम सहित सभी दरबारी वहाँ उपस्थित थे. अचानक एक चरवाहा वहाँ आया और न्याय की गुहार लगाने लगा, “महाराज! न्याय कीजिये….न्याय कीजिये.”

 


तेनाली राम की परीक्षा 

24 June 2017

राजा कृष्ण देव राय का दरबार लगा हुआ था और उनका दरबारियों से विचार-विमर्श चल रहा था. कुछ देर विचार-विमर्श के उपरांत चतुर और चतुराई पर चर्चा चल पड़ी. राजगुरु सहित दरबार के अधिकांश मंत्री तेनाली राम से जलते थे.


सबसे कीमती उपहार

14 June 2017

एक बड़े युद्ध में विजय प्राप्त कर राज्य वापस लौटे राजा कृष्णदेव राय बहुत प्रसन्न थे. अपनी प्रसन्नता प्रदर्शित करते हुए उन्होंने सभी दरबारियों को उपहार वितरित करने का एलान किया.


तेनाली राम और मनहूस

11 June 2017

विजयनगर में रामया नामक व्यक्ति रहता था. उसे उस नगर के सभी निवासी मनहूस समझते थे. सबका ये मानना था कि यदि कोई व्यक्ति सुबह सोकर उठने के उपरांत सबसे पहले रामया का मुख देख ले, तो उसे पूरे दिन भोजन की प्राप्ति नहीं होती.


तेनाली राम और जादूगर

5 June 2017

एक दिन एक जादूगर कृष्णदेव राय के दरबार में आया. अपने जादू के और करामातों से उसने सभी दरबारियों का बहुत मनोरंजन किया. कृष्णदेव राय भी उसके जादू से मंत्र मुग्ध हो गए.


तेनाली राम की नियुक्ति

28 May 2017

बहुत समय पहले की बात है. दक्षिण भारत में विजयनगर नामक राज्य था, जहाँ राजा कृष्णदेव राय राज्य किया करते थे. उस राज्य के एक गाँव तेनाली में रामकृष्ण नामक एक गरीब ब्राह्मण रहा करता था. वह बुद्धिमान और वाकपटु होने के साथ-साथ एक श्रेष्ठ कवि भी था.