सत्रह ऊँट और तीन पुत्र : प्रेरणादायक कहानी

Seventeen Camels And Three Sons Motivational Story In Hindi


Seventeen Camels And Three Sons Motivational Story In Hindi

Seventeen Camels And Three Sons Motivational Story In Hindi

रेगिस्तानी इलाके में स्थित एक गाँव में एक वृद्ध व्यक्ति अपने तीन पुत्रों के साथ रहता था. उसके पास १७ ऊँट थे.

एक दिन उस वृद्ध की मृत्यु हो गई. क्रियाकर्म के पश्चात उसकी वसीयत खोली गई. उस वसीयत में उसने अपनी संपत्ति के साथ–साथ १७ ऊँटों का भी अपने पुत्रों के मध्य बंटवारा किया था.

संपत्ति तो बराबर-बराबर सभी पुत्रों में बांट दी गई. लेकिन ऊँटों की संख्या १७ थी, जो एक विषम और अभाज्य संख्या है. इसलिए उसका बराबर बंटवारा संभव नहीं था.

वसीयत में वृद्ध ने कुल ऊँटों का आधा हिस्सा अपने ज्येष्ठ पुत्र, कुल ऊँटों का एक तिहाई मंझले पुत्र और कुल ऊँटों का नौवां हिस्सा कनिष्ठ पुत्र के नाम किया था.

वसीयत पढ़कर तीनों पुत्र अवाक थे. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि कैसे इन ऊँटों का बंटवारा करें. धीरे-धीरे उनमें इस बात पर मतभेद होने लगा. जब मतभेद बहुत बढ़ गया, तो उन्होंने गाँव के एक विद्वान व्यक्ति के पास जाकर मतभेद सुलझाने का निर्णय लिया.

तीनों विद्वान व्यक्ति के पास पहुँचे और अपने मतभेद का कारण बताया. पूरी बात सुनने के बाद उस व्यक्ति ने इस मुद्दे विचार करने के लिए कुछ दिनों का समय मांगा.

कुछ दिनों के पश्चात तीनों पुत्र पुनः विद्वान व्यक्ति के पास पहुँचे. उन्हें विश्वास था कि उनके मध्य के मतभेद को सुलझाने का उसने कोई न कोई मार्ग अवश्य ढूंढ निकाला होगा. लेकिन विद्वान व्यक्ति ने उनसे कहा, ”बहुत सोचने पर भी मुझे इसका कोई समाधान समझ नहीं आया. आप लोग ऐसा करो, मेरा एक ऊँट ले लो और फिर अपने ऊँटों को वसीयत अनुसार बांट लो.”

उन्होंने वैसा ही किया. विद्वान वृद्ध का ऊँट लेने के बाद कुल ऊँटों की संख्या १८ हो गई. वसीयत के मुताबिक ज्येष्ठ पुत्र को कुल ऊँटों का आधा भाग मिलना था. इसलिए १८/२ = ९ ऊँट उसके हिस्से में आये.

अब शेष ९ ऊँट बच गए थे. वसीयत के मुताबिक मंझले पुत्र को कुल ऊँटों का एक तिहाई भाग मिलना था. इसलिए उसे १८/३ = ६ ऊँट मिले.

कनिष्ठ पुत्र को वसीयत के मुताबिक कुल ऊँटों का नौवां भाग मिलना था. इसलिए उसे १८/२= २ ऊँट मिले.

इस प्रकार ९+६+२ ऊँट उन्हें बंटवारे में मिले, जिसका योग १७ था. विद्वान वृद्ध का ऊँट शेष रह गया था, जिसे उसने वापस ले लिया. इस तरह तीनों भाइयों की समस्या का निवारण हो गया और उनका मतभेद सुलझ गया.

मित्रों, जब कोई ऐसा मतभेद सामने हो, जिसका कोई निवारण संभव नहीं दिखता, तब उसे सुलझाने के लिए एक ऐसा सामान्य आधार तलाशना चाहिए, जिसमें सभी पक्ष एकमत हो. इस कहानी में वह सामान्य आधार १८वां ऊँट था. तदोपरांत सभी पक्षों से बातचीत कर समस्या सुलझाई जानी चाहिए. यही बुद्धिमत्ता है.


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