Pencil Ke Gun Short Moral Story In Hindi

पेंसिल के गुण : शिक्षाप्रद कहानी

Pencil Ke Gun Short Moral Story In Hindi

Pencil Ke Gun Short Moral Story In Hindi

एक दिन एक बालक ने अपनी माँ को पत्र लिखते हुए देखा. वह उसके पास गया और पूछा, “माँ! तुम पत्र में क्या लिख रही हो? क्या तुम मेरी शरारतों के बारे में लिख रही हो?”

माँ बालक को देखकर मुस्कुराई और बोली, “हाँ बेटा, लिख तो मैं तुम्हारी शरारतों के बारे में ही रही हूँ. लेकिन जो शब्द मैं लिख रही हूँ, उससे कहीं अधिक महत्व इस पेंसिल का है, जो मैं इस्तेमाल कर रही हूँ. यह पेंसिल हमें जीवन से जुड़े कई अहम पाठ पढ़ाती है. मुझे आशा है कि जब तुम बड़े हो जाओगे, तो बिल्कुल इस पेंसिल की तरह बनोगे.”

बालक को माँ की बात समझ नहीं आई. वह पेंसिल को ध्यान से देखने लगा, फिर बोला, “ऐसा इस पेंसिल में क्या है माँ? मुझे तो ये अन्य पेंसिलों के तरह ही दिखाई पड़ती है.”

माँ ने उत्तर दिया, “बेटा, ये तो तुम्हारे देखने का नज़रिया है. मैं तुम्हें बताती हूँ कि इसमें वे कौन से गुण हैं, जो तुम्हें अपने जीवन में अपनाने चाहिए.”

पहला गुण “हमारे भीतर महान उपलब्धियाँ और सफलता प्राप्त करने की योग्यता है. जैसे पेंसिल को लिखते समय सही दिशा-निर्देशन देने वाले हाथ की आवश्यकता होती, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में एक ऐसे हाथ की आवश्यकता होती है, जो हमारा सही दिशा में और निरंतर मार्गदर्शन कर सके. हमारे लिए वह हाथ ईश्वर का है, जो सदैव हमारा मार्गदर्शन करता है.

दूसरा गुण लिखते-लिखते पेंसिल की नोंक को पैना करने के लिए रुकना पड़ता है. इससे इसे कष्ट होता है, लेकिन यह तेज हो जाती है और अच्छे से अच्छा लिख पाती है. इससे हमें सीख मिलती है कि जीवन में दुःख-तकलीफों, हार, अपमान का धैर्य से सामना करो. समय-समय पर अपनी क्षमताओं का परीक्षण करो और नयी चीज़ें सीख कर अपनी प्रतिभा को निखार लो.

तीसरा गुण  गलतियाँ सुधारने के लिए पेंसिल रबर के प्रयोग की इज़ाज़त देती है. जीवन में गलती हो जाना स्वाभाविक है. लेकिन इस गलती को स्वीकार कर इसमें सुधार करना एक बेहतर इंसान बनने के लिए आवश्यक है.

चौथा गुण  पेंसिल की कार्यप्रणाली में मुख्य भूमिका बाहर की लकड़ी का नहीं, बल्कि अंदर की ‘ग्रेफाइड’ का है. ग्रेफ्राइड की गुणवत्ता जितनी अच्छी होगी, लेखनी उतनी ही अच्छी होगी. इसलिए अपने बाहरी रूप से अधिक हमें अपने अंदर चल रहे विचारों के प्रति सजग रहना चाहिए.

पाँचवा गुण  पेंसिल सर्वदा अपने निशान छोड़ जाती है. ठीक उसी प्रकार हम जीवन में जो भी करते है, उसके निशान छोड़ जाते है. इसलिए हमें जीवन में ऐसा कोई कर्म नहीं करना चाहिए, जिसके लिए हमें लज्जित होना पड़े. इसलिए हमें अपने कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए और सर्वदा अच्छे कर्म करना चाहिए.

इस तरह पेंसिल है तो छोटी सी, किंतु जीवन जीने का बड़ा पाठ पढ़ाती है.

 

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