बैल का दूध : अकबर बीरबल की कहानी

Milk Of An Ox Akbar Birbal Story In Hindi


Milk Of An Ox Akbar Birbal Story In Hindi

Milk Of An Ox Akbar Birbal Story In Hindi

बादशाह अकबर का दरबार लगा हुआ था. दरबार में अन्य सभी दरबारी उपस्थित थे, केवल बीरबल को छोड़कर.

बीरबल की अनुपस्थिति का लाभ उठाकर कुछ दरबारी उनके विरूद्ध बादशाह के कान भरने लगे. वे कहने लगे, “जहाँपनाह! बीरबल अक्सर दरबार में विलंब से आते है और चालाकीपूर्ण बातों से आपको मना लेते हैं.”

“वह चालाकी नहीं, बीरबल की सूझबूझ और अक्लमंदी की बातें होती है.” अकबर ने प्रतिकार किया.

“जहाँपनाह! यदि बीरबल वाकई में अक्लमंद है, तो उसे बैल का दूध लाने के लिए कहिये. देखते है, कैसे वह अपनी अक्लमंदी साबित करता है.” एक दरबारी ने अकबर को उकसाया.

अकबर सोचने लगे कि बीरबल की खिंचाई करने का यह मौका अच्छा है. यह कार्य वह कर ही नहीं सकता. इस प्रकार दरबारियों की बात भी रह जायेगी और पहली बार बीरबल को मात भी खानी पड़ेगी.

जब बीरबल दरबार पहुँचा, तो अकबर ने उससे कहा, “बीरबल! तुम्हारा यह मानना है ना कि दुनिया में कोई कार्य असंभव नहीं है.”

“जी हुज़ूर! यक़ीनन मेरा यही मानना है.” बीरबल ने उत्तर दिया.

“तो जाओ और मेरे लिए बैल का दूध लेकर आओ.” अकबर ने हुक्म दिया.

“बैल का दूध?” बीरबल आश्चर्यचकित रह गया.

“हाँ” अकबर ने हामी भरी.

“जहाँपनाह, दूध तो गाय देती है, बैल नहीं.” बीरबल ने प्रतिकार करने का प्रयास किया.

“ये तो सब जानते हैं बीरबल. तुम मुझे कुछ नया नहीं बता रहे हो. लेकिन मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे लिए बैल का ही दूध लेकर आओ.”

बीरबल समझ गया कि बादशाह से बहस करने का ये उचित समय नहीं है. वह एक सप्ताह का समय लेकर दरबार से चला गया.

बीरबल जानता था कि अगर वह इस कार्य में सफल न हो सका, तो अवश्य बादशाह के द्वारा दंडित किया जायेगा. इसलिए घर पहुँचने के पहले रास्ते भर वह इस समस्या से बाहर निकलने का उपाय सोचता रहा.

घर पहुँचते तक उसे एक उपाय सूझ गया था. उसने फ़ौरन अपनी पुत्री को बुलाया और उसे सारा वृत्तांत सुनाने के बाद कहा, “आज आधी रात तुम्हें बादशाह अकबर के महल के पीछे के कुएं में जाकर कपड़े धोने हैं.”

पुत्री बीरबल की बात समझ गई. वो आधी रात को महल ने पीछे के कुएं पर पहुँची और कपड़े धोने लगी. बीरबल पास ही एक पेड़ के पीछे छुप गया.

बीरबल के कहे अनुसार उसकी पुत्री कपड़ों को जोर से पीट-पीट कर धो रही थी. कपड़ों को पीटने की आवाज़ें रात के सन्नाटे में गूंजने लगी. इन आवाजों ने सो रहे बादशाह अकबर की नींद में खलल पड़ गई. उन्होंने फ़ौरन अपने सेवकों को बुलवाया और शोर करने वाले व्यक्ति को अपने समक्ष हाज़िर करने का हुक्म दिया. सेवक बीरबल की पुत्री को पकड़कर ले आये.

अकबर ने उससे पूछा, “बच्ची, क्या बात है तुम आधी रात को कपड़े क्यों धो रही हो?”

बीरबल की पुत्री ने उत्तर दिया, “हुज़ूर! बात ये है कि मेरी माता अपने मायके गई हुई है. और उनकी गैरमौजूदगी में मेरे पिता ने एक खूबसूरत बच्चे को जन्म दिया है. दिन भर उनकी सेवा में लगे होने के कारण मुझे समय ही नहीं मिल सका. कल भी दिन में मुझे शायद ही समय मिल सके. इसलिए आधी रात में ही मुझे सारे कपड़े धोने होंगे.”

यह विचित्र बात सुनकर अकबर बोले, “तुम मुझे बेवकूफ बना रही हो. भला आदमी भी कभी बच्चे पैदा करते है?”

“बिल्कुल ठीक कहा हुज़ूर! अब आप ही बताइए, जब आदमी बच्चे पैदा नहीं करते, तो बैल दूध कैसे दे सकता है.” बीरबल की पुत्री बोल पड़ी.

यह उत्तर सुनकर अकबर समझ गए कि हो न हो अपनी बात समझाने के लिए बीरबल ने ही यह स्वांग रचा है और उन्होंने पूछा, “‘तुम बीरबल की पुत्री हो न?”

यह सुनना था कि बीरबल पेड़ के पीछे से बाहर निकल आया और अकबर से उनकी नींद में खलल डालने के लिए क्षमा मांगने लगा.

अकबर ने बीरबल की अक्लमंदी का लोहा मानते हुए बैल का दूध मंगवाने की बात पर अपनी गलती स्वीकार कर ली.



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