कुएं का विवाह : तेनाली राम की कहानी

Kuwen Ka Vivah Tenali Rama Story In Hindi


Kuwen Ka Vivah Tenali Rama Story In Hindi

Kuwen Ka Vivah Tenali Rama Story In Hindi

एक बार राजा कृष्णदेव राय और तेनाली राम के मध्य किसी विषय पर बहस हो गई. बहस इतनी बढ़ गई कि तेनाली राम रूठ गए और नगर छोड़कर कहीं चले गए.

कई दिन बीत जाने के उपरांत भी जब तेनाली राम नहीं लौटे, तो राजा को उनकी याद सताने लगी. उन्होंने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि तेनाली राम को कहीं से भी दूंढकर उनके सामने प्रस्तुत किया जाये.

सैनिकों के कई गाँव और नगर छान मारे, किंतु तेनाली राम का कुछ पता नहीं चला. वे मुँह लटकाए वापस लौट आये. अंततः राजा ने तेनाली राम को वापस बुलाने के लिए एक तरकीब लड़ाई.

उन्होंने सारे राज्य में मुनादी करवा दी कि वे अपने राजकीय कुएं का विवाह करवा रहे है. इसलिए सभी गाँवों के मुखिया अपने-अपने राज्य के सारे कुओं को लेकर राजधानी में उपस्थित हो. ऐसा न करने पर उनसे एक हज़ार स्वर्ण मुद्राओं का जुर्माना वसूल किया जायेगा. यह मुनादी सुनकर सभी गांवों के मुखिया चिंतित हो उठे क्योंकि ऐसा करना असंभव था.

जिस गाँव में तेनाली राम भेष बदलकर छुपा हुआ था, वहाँ भी यह मुनादी करवाई गई. जब तेनाली राम ने यह मुनादी सुनी, तो वह समझ गया कि अवश्य ही यह उसे दूंढने के लिए महाराज की तरकीब है.

उस गाँव का मुखिया भी चिंतित था. एक दिन तेनाली राम ने उसे अपने पास बुलाया और कहा कि वह आस-पास के गांवों के मुखियाओं को एकत्रित करे और जैसा वह कहता है वैसा ही करे.

मुखिया ने वैसा ही किया. वह सभी गांवों के मुखियाओं को लेकर विजयनगर की ओर चल पड़ा. भेष बदलकर तेनालीराम भी उनके साथ था. नगर के बाहर वे सभी एक स्थान पर रुक गए और एक संदेशवाहक को राजा के पास भेजा.

संदेशवाहक दरबार पहुँचा और संदेश सुनाने लगा, “महाराज, गांवों के कुएं विवाह में सम्मिलित होने के लिए नगर के बाहर रुके हुए हैं. आप कृपया राजकीय कुएं को उनकी आगवानी के लिए वहाँ भेंजें.”

यह सुनना था कि राजा समझ गए कि ये तेनालीराम की ही तरकीब है. उन्होंने संदेशवाहक से पूछा कि यह उपाय उसे किसने बताया है.

तब संदेशवाहक ने बताया कि उनके गाँव में एक परदेशी आकर रुका है, उसी ने यह उपाय सुझाया है. यह सुनकर राजा स्वयं नगर के बाहर पहुँचे और तेनाली राम को ससम्मान दरबार में वापस लेकर आये. साथ ही गाँव वालों को पुरुस्कार देकर विदा किया.

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