Cup of Tea Moral Story In Hindi

चाय का कप : नैतिक कथा

Cup Of Tea Moral Story In Hindi

Cup Of Tea Moral Story In Hindi

Cup of Tea Moral Story In Hindi

 

एक बार कॉलेज के भूतपूर्व छात्रों का group अपनी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर से मिलने पहुँचा. सभी काफी अरसे बाद मिल रहे थे. इन अरसों में सभी छात्र अपने-अपने करियर में बहुत अच्छी position हासिल कर चुके थे.

सबके बीच बातों का सिलसिला प्रारंभ हुआ, जो बढ़ते-बढ़ते ज़िन्दगी और job की परेशानियों की ओर घूम गया. अब ये बातें न रह कर शिकायतें बन गई थी.

कुछ देर सबकी बातें सुनने के बाद उनके प्रोफेसर उठे और किचन में जाकर सबके लिए चाय बनाने लगे. जब वे किचन से बाहर आये, तो उनके हाथ में एक ट्रे था. उस ट्रे पर चाय से भरी हुई एक बड़ी केतली थी और साथ ही पोर्सिलेन, प्लास्टिक, क्रिस्टल आदि के बने हुए मँहगे, सस्ते, साधारण और इस तरह विभिन्न प्रकार के कप थे. प्रोफेसर ने सभी को अपने हिसाब से खुद ही चाय सर्व करने के लिए कहा.

जब सभी छात्रों ने अपने अनुसार अपने चुनिंदा कपों में चाय ले ली, तो प्रोफेसर बोले:

“क्या आपने ध्यान दिया कि आप लोगों ने सभी अच्छे और मँहगे कप उठा लिए, लेकिन साधारण और सस्ते कपों को ट्रे में ही छोड़ दिया? ज़ाहिर है आप सभी अपने लिए सर्वश्रेष्ठ या ‘Best’ ही चाहते है. यही आपकी परेशानियों और तनाव की जड़ है. यदि कुछ देर ले लिए ये मान लिया जाये कि ज़िन्दगी चाय है और जॉब, पैसा और position ज़िन्दगी रूपी चाय को रखने और फिर उसे पकड़ने में इस्तेमाल होने वाले कप है. तो हम समझ पायेंगे कि जिस तरह के कप हमने पकड़े हुये है, वो न तो उस ज़िन्दगी को परिभाषित कर सकते है, जो हम जी रहे हैं, न ही उसके स्वरुप को परिवर्तित कर सकते है. कभी-कभी सिर्फ कप पर ध्यान केंद्रित करने से हम उस चाय का आनंद नहीं ले पाते, जो भगवान ने हमें प्रदान की है. भगवान चाय तैयार करता है, कप नहीं…..”     

          

सीख – प्रसन्न व्यक्ति के पास सबकुछ सर्वश्रेष्ठ नहीं होता. उसके पास जो भी होता है, वह उसे सर्वश्रेष्ठ बना लेता है. नम्रता से बोलो, उदारतापूर्वक प्रेम करो, गहराई से सेवा करो और सरलता से जिओ.         

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