AIDS से जूझते पूर्व नंबर एक टेनिस खिलाडी आर्थर ऐश का प्रेरक प्रसंग

“हमेशा भगवान के शुक्रगुज़ार रहें”

“Always Thankful To God”


Arthur Ashe Moral Storyविश्व के पूर्व नंबर एक टेनिस खिलाड़ी आर्थर ऐश (जुलाई 10, 1943 – फरवरी 6, 1993) एकमात्र अश्वेत पुरुष खिलाड़ी है, जिन्होंने विम्बलडन, ऑस्ट्रेलियन ओपन और यू० एस० ओपन टूर्नामेंट का ख़िताब अपने नाम किया था.

शानदार टेनिस करियर के बाद उनके जीवन में एक ऐसा दौर भी आया, जब वे AIDS जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से जूझ रहे थे. एक सर्जरी के दौरान infected blood चढ़ाने के कारण वे इस घातक बीमारी की चपेट में आ गए थे.

उनकी बीमारी के बारे में जानने के बाद विश्व के कोने-कोने से लोग उनसे सहानुभूति जताने पत्र लिखने लगे. एक दिन ऐसा ही एक पत्र आर्थर ऐश को मिला, जिसमें लिखा था, “क्या आप भगवान से कभी ये नहीं पूछते कि इस बुरी बीमारी के लिए मैं ही क्यों?”

पत्र पढ़ने के बाद आर्थर ऐश ने उसका कुछ यूँ उत्तर दिया, “विश्व में 5 करोड़ से अधिक बच्चे टेनिस खेलना शुरू करते है. उनमें से 5 लाख Professional टेनिस सीख पाते हैं. फिर उनमें से 50 हजार टेनिस सर्किट में आ पाते है. उनमें से भी 5000 ही ग्रैंड स्लैम में खेल पाते है. उन ग्रैंड स्लैम खेलने वालों में से सिर्फ 50 ही विम्बलडन में पहुँचते है, जिसमें से मात्र 4 उसके सेमी फाइनल और 2 फाइनल में पहुँचते है. इतने लोगों में से विम्बलडन जीतने के बाद जब ट्राफी को पकड़े हुए मैंने भगवान से कभी ये नहीं पूछा – मैं क्यों? तो आज जब मैं तकलीफ में हूँ, तो मुझे भगवान से ये नहीं पूछना चाहिए – मैं क्यों? अपने जीवन की 98 प्रतिशत अच्छी चीजों के लिए हमें भगवान का शूक्रिया अदा करना चाहिए.”

अपनी मृत्यु के पूर्व आर्थर ऐश ने Arthur Ashe Institute For Urban Health स्थापित लिया और मृत्यु पर्यंत लोगों में AIDS के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य करते रहे.

 

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